दोस्ती पर झंझट, भगवा में दरार और तलाक

अखिलेश अखिल


जिस तरह की ख़बरें महाराष्ट्र से मिल रही है वह चौंकाती भी है और भरमाती भी है। लेकिन शर्मसार नहीं करती। ठगिनी राजनीति का यही चरित्र जो है। ठगिनी राजनीति की उत्पत्ति बेईमान और दगाबाज नेताओं के गर्भ से होती है। चुकी नेता झाँसाबाज होता है इसलिए राजनीति पूरी तरह से ठगिनी होती है। राजनीति में किसी का हित नहीं होता। हित पार्टी का और झाँसाबाजों का होता है। जब प्राकृतिक जुगलबंदी ही नहीं तो बिलगाव पर क्या दुःख। बीजेपी -शिवसेना की राजनीती दो ध्रुवों की रही है लेकिन मौकापरस्ती ने मेल कराया था।

वजह एक ही थी भगवा राजनीति और हिन्दू राजनीति के नाम पर झांसा तंत्र को आगे बढ़ाना। चुकी झांसा बहुत दिनों तक नहीं दिया जा सकता इसलिए एकता में दरार आ गयी। शिवसेना ने ऐलान कर दिया कि अगला लोक सभा चुनाव अब वह बीजेपी के साथ नहीं लड़ेगी। बात सिर्फ इतनी भर ही है। लेकिन राजनीति इतनी भर से नहीं होती। इसके बाद का झांसा भी तैयार है। मौक़ा का दुसरा दौर जारी होगा और राजनीति के दलदल में लोगों को फसाया जाएगा। एक दूसरे को एक्सपोज़ किया जाएगा। कल तक जो अपने थे उसे नंगा किया जाएगा। उसके लिए तर्क ढूढ़े जाएंगे। नीतीश और लालू के बिलगाव को याद रखियेगा तब राजनीती की समझ कुछ ज्यादा बढ़ेगी।

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तो कहानी यह है कि शिवसेना ने पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक के बाद यह फैसला किया है कि वह 2019 में अकेले अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ेगी। पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक के बाद में पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राऊत ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने फैसला किया है कि राज्य में पार्टी अपने गढ़ बचाएगी और अपने को मजबूत करेगी।

बता दें कि राज्य में अभी बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन सरकार है। बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है और पिछला चुनाव शिवसेना और बीजेपी ने अकेले अकेले ही लड़ा था। चुनाव परिणामों के बाद सत्ता समीकरण के चलते दोनों दलों में गठबंधन हुआ था और बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनी थी। महाराष्‍ट्र विधानसभा की स्थिति के अनुसार भाजपा+ सहयोगी- 122+ 1, शिवसेना – 63, कांग्रेस – 42, एनसीपी – 41, एआईएमआईएम – 2 है। महाराष्‍ट्र में लोकसभा की स्थिति कुल – 48, भाजपा – 23, शिवसेना – 18 , कांग्रेस – 2 , एनसीपी – 4, स्‍वाभिमानी पार्टी – 1 है।

कार्यकारिणी के बैठक में बोलते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने जो विश्वास उनपर और पार्टी पर जताया है वह उसे आभारी हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी से अलग चुनाव लड़ने का फैसला काफी विचार करने के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर सरदार वल्लभ पटेल होते तो कश्मीर का मुद्दा न बनता, मराठवाड़ा आजाद नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही कई दलों को पाकिस्तान की याद आ जाती है। ठाकरे ने कहा कि रोज सैनिकों की मौत हो रही है, कुर्बानी याद की जाती है, फिर हम सब भूल जाते हैं। उन्होंने पीएम ने 56 इंच के छाती वाले बयान पर तंज कसा और कहा कि छाती से कुछ नहीं होता उसमें हिम्मत कितनी है, गौरव कितना है यह अहम है। तो कहानी साफ़ है कि भगवा पार्टी अब जुदा होकर खेल करेंगे और राजनीति का नया पाठ पढ़ाएंगे।

लेकिन मामला सिर्फ महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है। और कुछ राज्यों में भी इस तरह की जुदाई सामने आने वाली है। बिहार में भी और कुछ अन्य राज्यों में भी। राजनीति का यह शिखंडी चरित्र हमें खूब भाती है और हमें इसपर गुमान भी है।

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