अल्पसंख्यकों को पाले में खींचने के लिए सिद्दारमैया सरकार ने खेला नया दांव

बेंगलुरु : कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राज्य की सिद्दारमैया सरकार ने अपना राजनैतिक पैतरा बदलना शुरू कर दिया है। जिसके चलते राज्य सरकार ने एक नया सर्कुलर जारी कर सूबे का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। राज्य में सिद्धारमैया सरकार ने जो सर्कुलर जारी किया है उसमें अल्पसंख्यकों, किसानों और कन्नड़ आंदोलनकारियों के खिलाफ केस वापस लेने की बात कही है। वहीँ बीजेपी ने सरकार के इस सर्कुलर को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए इसे चुनाव के पहले अल्पसंख्यकों को रिझाने की कोशिश करार दिया है।

खबरों के मुताबिक कर्नाटक के डीजीपी नीलमणि एन राजू ने शुक्रवार को सर्कुलर जारी किया। इसमें अल्पसंख्यकों के खिलाफ पिछले 5 सालों में सांप्रदायिक हिंसा के मामले वापिस लेने की बात कही गई है। इसमें खास बात यह है कि यह सर्कुलर केवल पिछले 5 सालों पर ही लागू होगा। सरकार का दावा है कि उसने यह कदम युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया है।वहीं इस मामले में बीजेपी ने सरकार पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगा दिया है। कर्नाटक भाजपा के प्रभारी मुरलीधर राव ने कहा है कि कांग्रेस का मकसद भाजपा कार्यकर्ताओं को डराकर चुनावी फायदा उठाने का है। वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि हम निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मामले वापिस लेना चाहते हैं। इनमें अल्पसंख्यक ही नहीं बल्कि किसान और कन्नड़ आंदोलनकारी भी शामिल हैं।

इसी के साथ सरकार अपने 6.2 लाख कर्मचारियों और पेंशनधारकों को भी नया तोहफा दे सकती है। खबरों के मुताबिक फरवरी में बजट पेश करने के दौरान सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 24 से 20 फीसद की बढ़ोतरी की जा सकती है। इतना ही नहीं सरकरा हर महीने पहले और चौथे शनिवार को सरकारी दफ्तरों की छुट्टी का भी एलान कर सकती है।बता दें कि कर्मचारी संगठनों की तरफ से उठ रही मांगो को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पिछले बजट में एक कमेट की घोषणा की थी। इस कमेटी ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारोकों के वेतन में बढ़ोतरी की मांग की थी।

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