सिद्धरमैया ने भाजपा के खिलाफ आतंकी संरक्षित संगठनों को दिया सहयोग: भाजपा

बेंगलुरु: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कर्नाटक के मौजूदा सिद्धरमैया सरकार पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) कार्यकर्ताओं की हत्याओं में लिप्त कथित संगठनों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। भाजपा ने सिद्धरमैया सरकार पर केंद्र की योजनाओं को जान-बूझकर रोकने और किसानों की योजनाओं का बजट खर्च नहीं करने का भी आरोप लगाया है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एस. प्रकाश और अश्वत्थ नारायण ने संयुक्त रूप से विशेष बातचीत के दौरान कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एजेंडा तलाशने में लगी हुई है, जिसे वह केंद्र में मुद्दा बना सके। जबकि राज्य में मुख्य मुद्दा लॉ एंड ऑर्डर का है। एस. प्रकाश ने कहा कि राज्य में पिछले तीन साल में 3800 किसानों ने आत्महत्या कर ली। गन्ना किसानों को फसल किसान बीमा योजना का लाभ आज तक नहीं मिला। इन्हीं कारणों के चलते अधिकतर किसानों ने आत्महत्या की है। अबतक (31 मार्च) केवल 10 लाख की राशि का ही आवंटन राज्य सरकार ने किया है।

वहीं, कर्नाटक प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनवर मानापाड़ी ने सिद्धरमैया सरकार पर भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं की हत्याओं में लिप्त कथित संगठनों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए केंद्र से इसकी निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में आरएसएस और भाजपा के 24 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, जिसमें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) संगठनों का हाथ है। उन्होंने इन संगठनों को आतंकी करार देते हुए कहा कि सिद्धरमैया सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान इन संगठनों को संरक्षण दिया है।

उन्होंने कहा कि पीएफआई वही पार्टी है जिसे केरल में प्रतिबंधित करने के लिये पूर्ववती ओमान चांडी सरकार ने तत्काल संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार (यूपीए) से मांग की थी। पूर्व अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष ने कहा कि केरल के तत्कालीन कोंग्रेस के ही मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने उस समय स्वीकार किया था कि पीएफआई प्रतिबंधित संगठन सिमी का पुनर्जन्म है, लेकिन कर्नाटक में सरकार आने के बाद राज्य में इसे फिर से सहयोग कर भाजपा के खिलाफ उपयोग किया गया।

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