तो क्या पूर्व कैग विनोद राय पर बंदूक रख की गई यूपीए 2 की राजनीतिक हत्या ?

अखिलेश अखिल


नई दिल्ली: यह बात और है कि 2 जी घोटाले के आरोपी रहे ए राजा पिछले माह ही निचली अदालत से बरी हो गए है लेकिन उनपर लगे घोटाले के दाग से वे आज भी परेशान हैं। उनका मानना है कि पूर्व कैग विनोद राय का व्यवहार उस बिल्ली की तरह था जिसने अपनी आंखें बंद कर रखी हो और एलान कर दिया कि पूरे ब्रह्मांड में अंधेरा छाया है। विनोद राय वैसे सूत्रधार की भूमिका में नजर आ रहे थे, जिसने काल्पनिक तस्वीर पेश की जिसके पीछे मीडिया और विरोधी पार्टियां लग गयीं।

उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा है कि यूपीए-टू की हत्या करने के लिए राजनीतिक साजिश रची गयी जिसके लिए विनोद राय के कंधे पर बंदूक रखने का काम किया गया। आपको बता दें कि पूर्व दूरसंचार मंत्री और टू जी घोटाले में आरोपी रहे ए राजा ने ‘2जी सागा अनफोल्ड्स’… नामक एक किताब लिखी है। इस किताब में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लेकर पूर्व सीएजी विनोद राय और घोटाले को लेकर कई खुलासे उन्होंने किये हैं। किताब में ए राजा ने घोटाले पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुप्पी पर प्रश्‍न चिन्ह लगाया है।

ए राजा ने लिखा है कि दूरसंचार मंत्रालय के हर फैसले की जानकारी मनमोहन सिंह को रहती थी लेकिन वे कभी मेरा बचाव करते नजर नहीं आये। मनमोहन सिंह को उनके सलाहकार गलत जानकारी दे रहे थे और पीएमओ दूरसंचार लॉबी के दबाव में काम कर रहा था।

मनमोहन सिंह की चुप्पी के बारे में ए राजा ने अपनी किताब में लिखा है कि मेरी हर कार्रवाई जायज थी इसके बावजूद मनमोहन की चुप्पी ऐसी थी जैसी पूरे देश की अंतरआत्मा ने चुप्पी साध रखी हो। ए राजा यहीं नहीं रुकते। वे लिखते हैं कि मनमोहन सिंह को सीबीआई के छापों के बारे में भी जानकारी नहीं थी। आगे उन्होंने लिखा कि 22 अक्टूबर 2009 को सीबीआई ने दूरसंचार मंत्रालय और कुछ दूरसंचार कंपनियों के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। उसी शाम सात बजे मैं साउथ ब्लॉक में पीएम से उनके दफ्तर में मिला।

पीएमओ में प्रधान सचिव टीके नायर भी वहां उपस्थित थे। लोगों को ये जानकर हैरानी होगी कि जब मैंने पीएम को सीबीआई छापों के बारे में बताया तो वो चौंक गये थे। राजा की ये किताब बहुत कुछ कह रही है। सत्ता सरकार और राजनीति पर कई तरह के आरोप इस किताब के जरिये लगाए जा रहे हैं।

यहां चर्चा कर दें कि 2010 में सीएजी के खुलासे के बाद एक लाख छिहत्तर करोड़ रुपये का ये कथित घोटाला प्रकाश में आया था। 2008 में तत्कालीन यूपीए-2 की सरकार में टेलीकॉम कंपनियों को 2G स्पेक्ट्रम का आवंटन में नियमों की अनदेखी कर उन्हें लाभ पहुंचाने का आरोप लगा था। साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने 2G स्पेक्ट्रम के सभी 122 लाइसेंस रद्द कर दिया। इस घोटाले में ए राजा सलाखों के पीछे भी जा चुके हैं।

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