यूपी के डीजीपी का कार्यभार संभाला ओपी सिंह ने, जानिए क्या है उनकी अगली रणनीति ?

लखनऊ : यूपी डीजीपी के नाम को लेकर जारी सस्पेंस मंगलवार को आईपीएस ओपी सिंह के डीजीपी का चार्ज ग्रहण करने के बाद समाप्त हो गया। साफ-सुथरी छवि वाले 1983 बैच के आईपीएस अफसर ओम प्रकाश सिंह इससे पहले केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक थे।

प्रदेश में डीजीपी का पद पिछले 22 दिन से खाली था। दरअसल सुलखान सिंह के रिटायर होने के बाद सरकार द्वारा ओपी सिंह का नाम नए डीजीपी के लिए फाइनल किया गया था, लेकिन केंद्र से रिलीव न मिलने के कारण नए डीजीपी के नाम को लेकर सस्पेंस बरकरार था। जिसके चलते सीएम योगी के आग्रह पर केंद्र सरकार ने उन्हें रिलीव किया, जिसके बाद आज सुबह उन्होंने अपना पदभार ग्रहण कर लिया।

साल 1983 बैच के आईपीएस सिंह सेंट जेवियर्स कॉलेज, नेशनल डिफेंस कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके सिंह आपदा प्रबन्धन में एमबीए के साथ-साथ एम.फिल डिग्रीधारी हैं। वह पूर्व में उत्तर प्रदेश तथा केन्द्र सरकार में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। वर्ष 1992-93 में लखीमपुर खीरी जिले के पुलिस अधीक्षक पद पर रहते हुए उन्होंने आतंकवादी गतिविधियों पर सख्ती से लगाम कसी थी। इसके अलावा लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पद पर काम करते हुए उन्होंने धार्मिक जुलूसों को लेकर अर्से पुराने शिया-सुन्नी विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभायी थी।

आपदा राहत बल के महानिदेशक के तौर पर सिंह ने जम्मू-कश्मीर में आयी बाढ़, नेपाल में आये विनाशकारी भूकम्प, हुदहुद तूफान तथा चेन्नई के शहरी इलाकों में आयी बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिये सराहनीय कार्य किये थे। सिंह को उत्कृष्ट सेवा के लिये वीरता पुरस्कार समेत कई तमगे भी मिल चुके हैं। शुक्रवार को मीडिया में उनको केंद्र से हरी झंडी न मिलने की खबरों के बाद राज्य सरकार ने दोबारा उनका नाम यूपी के डीजीपी के लिए भेजा था।

31 दिसंबर को डीजीपी सुलखान सिंह के रिटायर होने के बाद से प्रदेश के डीजीपी का पद खाली चल रहा था। योगी आदित्यनाथ की पहली पंसद बने ओपी सिंह के नाम का दोबारा प्रस्ताव भेजने पर केंद्र ने उन्हें रिलीव कर दिया। इसके चलते मंगलवार को सिंह ने अपना पदभार ग्रहण कर लिया।

गौरतलब है कि राजधानी लखनऊ में मंगलवार को नए डीजीपी कार्यभार ग्रहण करने से पहले ही रात में ही डकैतों ने उन्हें चुनौती दे दी। अभी काकोरी में पड़ी डकैती का खुलासा पुलिस कर भी नहीं पाई थी कि सोमवार रात मलिहाबाद थाना क्षेत्र में डकैतों ने खूब तांडव मचाया। क्षेत्र के हरदोई रोड स्थित सरावां गांव निवासी पूर्व प्रधान परमेश्वर रावत के घर देर रात करीब दो से तीन बजे के बीच नकाबपोश छह डकैतों ने हमला बोल दिया। छत के रास्ते घर में घुसे डकैतों में पहले तो पूरे घरवालों को बंदूक की नोंक पर कब्जे में ले लिया। फिर सभी को एक कमरे में बंद कर दिया।

इसके बाद परमेश्वर के बेटे श्यामू को बंदू की बट और लात-घूसों से खूब मारा-पीटा। उसके पास मौजूद पांच लाख रुपये लूट लिए। श्यामू की पत्नी को भी पीटकर उससे करीब दो लाख के जेवर लूट लिए। बदमाशों के जाने के बाद परिवारीजन श्यामू को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही उससने दम तोड़ दिया। फिलहाल सिंह देश की राजधानी दिल्ली की तरह यहां पर भी पुलिस महकमे को कमिश्नरी का दर्जा दिलाने के पक्ष में हैं। अगर यूपी में ऐसा होता है तो यहां भी पुलिस स्वतंत्र रूप से अपना कार्य कर सकेगी।

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