मेदांता लखनऊ में डेक्सट्रोकोंड्रिया हार्ट की हुई सफल सर्जरी

लखनऊ: दुनिया भर में हर साल लाखों सीऐबीजी (बाई-पास)सर्जरी की जाती हैं, जिनमें से केवल 5 लाख सर्जरी केवल यूएसए (USA) में ही की जाती है। हालांकि, एक डेक्सट्रोकार्डिएक हार्ट (जिसमें दाएं सीने में दिल होता हैं ) पर सीऐबीजी करना बहुत ही कठिन एवं चुनौतीपूर्ण होता है और चिकत्सा इतिहास में अब तक इस तरह के केवल 35 से काम मामले सामने आए हैं। और उनमें से ज़्यादातर मामलों में सीपीबी एंड शिरापरक नाली (Venous Conduit) का उपयोग किया गया था, जिनमें से 4 मामलों में सिर्फ सिंगल आर्टेरिअल कॉन्डुइट का ही उपयोग किया गया।

मेदांता लखनऊ में सीटीवीएस विशेषज्ञों की टीम द्वारा डॉ गौरांग मजूमदार के निर्देशन में एक 56 वर्षीय महिला, जिसका डेक्सट्रोकार्डिया हार्ट था, की बहुत ही अनोखी सीऐबीजी सर्जरी की गयी जो शायद कार्डिएक सर्जरी के इतिहास में पहली बार की गयी होगी। डेक्सट्रोकोंड्रिया हार्ट वाली इस 56 वर्षीय महिला को तीव्र एमआई और गंभीर एलवी डिसफंक्शन (30%) के साथ मेदांता लखनऊ में भर्ती कराया गया था। उसके एंजियोग्राम ने हार्ट की सभी वेसल्स में गंभीर ब्लॉकेज की पुष्टि की जिसके उपरान्त सीटीवीएस विशेषज्ञों की टीम ने डॉ गौरांग मजूमदार के निर्देशन में इस अनोखी, मगर बहुत ही चुनौतीपूर्ण सीऐबीजी सर्जरी करने का निर्णय लिया। इस सर्जरी की सबसे महत्वपूर्ण बात ये थी की इसमें सभी ब्लॉक्ड वेसल्स को बाईपास करते हुए,बिना महाधमनी(aorta) में कोई छेद किये, दोनों मैमरी आर्टरी का उपयोग किया गया और पूरी सर्जरी को टेबल के विपरीत साइड पर खड़े होकर किया गया जिसमें दाएं हाथ के सर्जन द्वारा कई बार बाएं हाथ का उपयोग करना पड़ा क्यूंकि महिला का हार्ट डेक्सट्रोकॉर्डिएक था (उसका दिल दाईं तरफ था) ।

अमूमन एक सामान्य व्यक्ति का हार्ट छाती के बाईं ओर होता है पर डेक्सट्रोकार्डिएक हार्ट वाले मरीज़ों में यह छाती के दायें ओर होता है और यही बात इस सर्जरी को अनूठा बनती है क्यूंकि इसमें चुनौतियां सामान्य रूप से कई गुना अधिक होती हैं और जिन्हें ध्यान में रखते हुए ऑपरेशन के तौर – तरीकों, जैसे कि – सर्जरी करते वक़्त कैनुलेशन तकनीक , ग्राफ्ट नली के विकल्प , ग्राफ्ट नली का कॉन्फ़िगरेशन, और सर्जन की स्तिथि में महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़ते हैं, जी को एक सर्जन के लिए करना बहुत की कठिन होता है।

हमे बेहद गर्व है कि इस विपरीत परिस्तिथि में भी, सीटीवीएस विशेषज्ञों की टीम ने डॉ गौरांग मजूमदार के निर्देशन में, इस बेहद अनोखी और चुनौतीपूर्ण सीऐबीजी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और बेहद ख़ुशी की बात है कि वह 56 वर्षीय महिला, जिस पर यह सर्जरी की गयी थी, उसे पूरी तरह से रिकवर होने के उपरान्त अस्पताल से छूट्टी दे दी गयी।

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