सुप्रीम कोर्ट किसी संचालक का दरबार नहीं: जस्टिस चेलमेश्वर

लखनऊ ट्रिब्यून दिल्ली ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा है कि “सुप्रीम कोर्ट किसी संचालक का दरबार नहीं है। कम से कम संविधान में ऐसे संचालक की शक्ति का जिक्र नहीं है।लेकिन व्यवहार में शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के मामले में प्रत्यक्ष रूप से प्रबंधन जैसा काम होता है। साथ ही, देश में उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालों के स्तर पर न्याय प्रशासन के विविध पहलुओं के संबंध में कानून बनाने में यही दस्तूर है।”

उन्होंने आगे कहा कि उदार लोकतंत्र बना रहे, इसके लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायपालिका बहुत ज़रूरी है। मुझे लगता है कि इसके बिना उदार लोकतंत्र नहीं फल-फूल सकता। जस्टिस चेलामेश्वर दिल्ली में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान ये बातें कही। जिस किताब का विमोचन हुआ उसका नाम है ‘सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया: द बिगनिंग्स’

उन्होंने आगे कहा कि समाधान अवश्य ढूंढना चाहिए। सच में समस्या है। समस्या के समाधन के तरीके व साधनों को तलाशने की जरूरत है। भारत की आबादी के आठवें से लेकर छठे हिस्से को सीधे तौर पर न्यायापालिका से वास्ता पड़ता है। आपको बता दें कि जस्टिस चेलामेश्वर सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में एक हैं जिन्होंने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अनियमितता को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से नाराज़गी जताते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था।

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