मोदी के मन की बात, जानिए क्या कहा प्रधानमंत्री ने

द लखनऊ ट्रिब्यून ब्यूरो : खुशी होती है कि भारत में आज महिलाएं आगे बढ़ रही हैं और देश का गौरव बढ़ा रही हैं। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 4०वीं बार मन की बात में कही। मोदी ने कहा कि प्राचीन काल से लेकर आज तक कई महिलाओं ने देश को विकसित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज सामान्य लोगों को भी पद्म पुरस्कार मिल रहे हैं। अवॉर्ड के लिए अब पहचान नहीं बल्कि काम जरूरी हो गया है।

महिलाएं पर क्या बोले प्रधानमंत्री
मोदी ने कहा कि खुशी होती है कि भारतीय विदुषियों की लंबी परंपरा रही है। वेदों को रचने में महिलाओं का असीम योगदान है। जैसे लोपामुद्रा और गार्गी। हम बेटी बचाओ की बात करते हैं। लेकिन, वेदों में कहा गया एक बेटी 1० बेटों के बराबर है।

उन्होंने कहा कि हमारे समाज में नारी को शक्ति का दर्जा दिया गया है। वो परिवार और समाज को एक सूत्र में बांधती हैं। नारी शक्ति हमेशा हमें प्रेरित करती आई है। नारी शक्ति माइल स्टोन स्थापित कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, एक रेल्वे स्टेशन का जिक्र करता हूं। माटुंगा भारत का पहला ऐसा स्टेशन है जहां हर तरफ महिला स्टाफ है।

इस बार बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीएसएफ की महिला कंटिन्जेंट ने रिपब्लिक डे पर समां बांध दिया। मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने एक नई मिसाल कायम की है। वहां का दंतेवाड़ा हिंसा प्रभावित है, फिर भी महिलाएं ई-रिक्शा चला रही हैं।

सफाई अभियान पर भी बोले
मोदी ने कहा कि मंगेश ने एक फोटो शेयर की है। एक पोता अपने दादा के साथ क्लीन मोरना अभियान में हिस्सा ले रहा है। मोरना पहले 12 महीने बहती थी, अब सीजनल हो गई है। एक एक्शन प्लान तैयार किया गया। 4 किमी दूर तक सफाई की गई। अकोला के 6 हजार और साथियों ने सफाई अभियान में हिस्सा लिया। इन लोगों को बहुत बधाई।

पद्म पुरस्कारों पर यह बोले पीएम
– पद्म पुरस्कारों की चर्चा हो रही है। थोड़ा बारीकी से देखें। कैसे-कैसे महान लोग हमारे बीच में हैं। आज सामान्य आदमी भी बिना किसी सिफारिश के ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं। तीन साल में प्रक्रिया बदल गई है।

– प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है। अब पुरस्कार देने के लिए पहचान नहीं उनका काम देखा जा रहा है।

– अरविंद गुप्ता ने बच्चों के लिए खिलौने बनाने का काम किया। वो आईआईटियन हैं। वो देश के तीन हजार स्कूलों में जाकर 18 हजार फिल्में दिखा रहे हैं। इसी तरह कर्नाटक की एक महिला और भज्जू श्याम, जो एमपी के कलाकार हैं, दोनों को पद्म सम्मान दिया गया।

लक्ष्मी कुट्टी शिक्षिका हैं। वो ताड़ के पट्टी की कुटिया में रहती हैं। उन्होंने 5०० दवाइयां बनाई हैं। सांप काटने के बाद की दवाई बनाती हैं। सुभाषिनी मिस्त्री एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने दूसरों के घरों में बर्तन मांजे। आज उनकी मेहनत से बनाए गए अस्पताल में हजारों लोगों का इलाज मुफ्त होता है।

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