राहुल गांधी का यह बदलाव कांग्रेस को वापस दिलाएगा दिल्ली का सिंहासन

अश्वनी श्रीवास्तव

नई दिल्ली : गुजरात विधानसभा चुनाव में भले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की हार हुई हो, लेकिन सही मायने में यह उनकी बड़ी जीत है. दरअसल पिछले तीन साल से बीजेपी के धोबीपाटा दांव से चारों खाने चित हो रहे राहुल गांधी भले ही कांग्रेस को गुजरात की सत्ता नहीं दिला सके. मगर उन्होंने पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को उनके ही घर में घुसकर चुनाव जीतने के लिए ‘नाकों चने चबाने’ पर मजबूर कर दिया.जिसके चलते कांग्रेस अध्यक्ष के हौसले बुलंद हो चले हैं और अब वह पूरी तरह से राजनीति में परिपक्य होते नजर आ रहे हैं.

फिलहाल उन्हें राजनीति का यह गुरुमंत्र किसने दिया.ये तो पार्टी के दिग्गज नेता भी नहीं जानते, लेकिन दिल्ली के एक बड़े कांग्रेसी नेता का कहना है कि राहुल गांधी में आया यह बदलाव कांग्रेस को फिर से दिल्ली के सिंहासन तक अवश्य ले जायेगा. हालांकि कुछ लोग यह बात कहते हैं कि इसके पीछे कांग्रेस अध्यक्ष कि एक दोस्त का हाथ है, जिसके समझाने पर राहुल गांधी के भीतर यह बड़ा परिवर्तन आया है.इसी का नतीजा है कि आज बजट सत्र के पहले दिन सियासी शिष्‍टाचार का बेमिसाल नजारा देखने को मिला. सियासी कटुता को भुलाकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने राष्‍ट्रपति के अभिभाषण से पहले और बाद में हंसते-मुस्कुराते गर्मजोशी से हाथ मिलाते या एक दूसरे का अभिवादन करने में राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को आड़े नहीं आने दिया.

बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पहली पंक्ति में बैठे और उनसे निरंतर संवाद करते दिखे. संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने भी सोनिया के पास जाकर उनसे कुछ मिनटों तक चर्चा की. आडवाणी और सोनिया के साथ दो पूर्व प्रधानमंत्रियों मनमोहन सिंह और एचडी देवेगौड़ा को पहली पंक्ति में बिठाया गया था.राहुल गांधी भी पहली पंक्ति में बैठे नजर आए, जिन पर सभी की निगाहें जमी थीं. राहुल को पहली पंक्ति में जगह देने को लेकर खास दिलचस्पी इसलिए रही, क्योंकि गणतंत्र दिवस परेड समारोह में उन्हें छठी पंक्ति में जगह दी गई थी. कांग्रेस ने इस पर काफी एतराज जताया था और इसे अपने नेता को अपमानित किया जाना कहा था. वहीं सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर सरकार की काफी किरकिरी हुई थी.

बहरहाल हमेशा सरकार पर निशाना साधने की मुद्रा में नजर आने वाले राहुल गांधी ने भी अपने व्‍यवहार से सभी का दिल जीत लिया. राष्‍ट्रपति का अभिभाषण खत्म होने के बाद बाहर जाने के लिए जैसे ही आडवाणी खड़े हुए, राहुल गांधी ने आगे बढ़कर उनका हाथ थाम लिया और बाहर निकलने में मदद की। इसी दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और सोनिया गांधी के बीच भी गर्मजोशी के साथ अभिवादन हुआ. मालूम हो कि यह कोई पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी और आडवाणी के बीच इस तरह की नजदीकी देखने को मिली है. बीते दिसंबर में संसद सत्र के दौरान भी कांग्रेस उपाध्‍यक्ष आडवाणी का हाथ पकड़ कर उनकी मदद की थी.

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