खजुराहो में ‘वीडी‘ को मिल रही है ‘कविता‘ से कड़ी चुनौती

खजुराहो संसदीय क्षेत्र 1989 से केवल एक अपवाद को छोड़कर भाजपा के अभेद्य किले में तब्दील हो चुका है। इस सीट पर 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सत्यव्रत चतुर्वेदी ने भाजपा के अखंड प्रताप सिंह को पराजित कर कांग्रेस की जीत का परचम लहराया था वह भी उस स्थिति में जबकि लगातार चार बार चुनाव जीतने वाली उमा भारती चुनाव लड़ने भोपाल आ गयी थीं। पिछले आठ लोकसभा चुनावों में से सात में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चूंकि यह भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ में तब्दील हो चुका है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यहां से अपने पसंदीदा उम्मीदवार विष्णुदत्त शर्मा (वीडी) को चुनाव मैदान में उतारा है इसलिए यह चुनाव भाजपा के लिए कम आरएसएस के लिए अधिक प्रतिष्ठा का है क्योंकि संघ ने हर हाल में वीडी को जिताने का बीड़ा उठा रखा है। संघ ने तय कर लिया था कि वीडी को हर हाल में चुनाव लड़वा कर लोकसभा में पहुंचाना है इसलिए उनके लिए एक सुरक्षित क्षेत्र की तलाश थी। पहले भोपाल फिर मुरैना, फिर विदिशा में संभावनायें तलाशी गयीं और अंतत: भाजपा ने उन्हें खजुराहो से चुनाव मैदान में उतार दिया। यहां वीडी को कांग्रेस उम्मीदवार कविता सिंह से कड़ी चुनावी टक्कर मिल रही है।

खजुराहो बुंदेलखंड अंचल की सबसे अहम लोकसभा सीट मानी जाती है क्योंकि यह बुंदेलखंड के साथ ही साथ विंध्य एवं महाकौशल की राजनीतिक धारा को भी बताती है। पिछले चुनाव में यहां से भाजपा के नागेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की थी, उन्होंने कांग्रेस के राजा पटेरिया को 2 लाख 47 हजार 490 मतों के भारी अन्तर से शिकस्त दी थी। कांग्रेस ने इस सीट पर उसके विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी कविता सिंह को मैदान में उतारा है। खजुराहो लोकसभा क्षेत्र में महाकौशल के कटनी जिले के तीन विधानसभा क्षेत्र आते हैं इनमें मुड़वारा, विजयराघवगढ़ और बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्रों के 6 लाख 90 हजार मतदाता खजुराहो लोकसभा सीट के लिए मतदान करेंगे। इस क्षेत्र में आने वाले आठ विधानसभा क्षेत्रों में से दो क्षेत्रों में कांग्रेस और छह में भाजपा विधायक हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव का तो भारी-भरकम बहुमत भाजपा के खाते में था लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव को देखा जाए तब यह मार्जिन घटकर एक लाख से कम हो गया है, फिर भी भाजपा उम्मीदवारों को कांग्रेस उम्मीदवारों पर 88 हजार 832 मतों की बड़ी बढ़त हासिल है। यही कारण है कि भाजपा के लिए इसे सबसे सुरक्षित गढ़ मानकर वीडी को यहां भाजपा प्रत्याशी बनाया गया है। बहुकोणीय मुकाबले में लगभग सीधी टक्कर भाजपा और कांग्रेस के बीच ही हो रही है।

बुंदेलखंड इलाके में जातिवाद का गहरा असर रहता है और पिछली बार कांग्रेस ने ब्राह्मण तो भाजपा ने ठाकुर उम्मीदवार मैदान में उतारा था। इस बार कांग्रेस प्रत्याशी ठाकुर है तो भाजपा प्रत्याशी ब्राह्मण, दूसरे भाजपा प्रत्याशी बाहरी भी हैं इस कारण उन्हें यहां इस गढ़ को बचाये रखने के लिए काफी जोर लगाना पड़ रहा है। जहां तक कविता सिंह का सवाल है वे छतरपुर राजपरिवार की बहू हैं और 2015 से खजुराहो नगर पंचायत की अध्यक्ष भी हैं। कविता सिंह के पति विक्रम सिंह नातीराजा छतरपुर जिले की राजनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं जो कि इसी लोकसभा क्षेत्र में आती है। पहला चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के रूप में बाकी चुनाव कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीते हैं। कविता सिंह के ससुर राजा बलवंत सिंह का विवाह पन्ना राजपरिवार में हुआ था और पन्ना जिले के तीन विधानसभा क्षेत्र भी इसी लोकसभा क्षेत्र में आते हैं, इसलिए पन्ना राजपरिवार के असर का लाभ भी कविता सिंह को मिल सकता है। यह भी संयोग है कि कविता का जिन दो राजपरिवारों से वास्ता है वे दोनों ही इसी लोकसभा क्षेत्र के अन्तर्गत आते हैं। भाजपा प्रत्याशी वीडी भले ही बाहरी हों लेकिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी रहते वे बुंदेलखंड की छात्र राजनीति से नजदीक से जुड़े रहे हैं और इस चुनाव में यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। मजबूत संगठन क्षमता और मिलनसार स्वभाव के साथ ही भाजपा का गढ़ होने का फायदा सहज स्वाभाविक रूप से वीडी को मिल सकता है तो वहीं कविता सिंह मिलनसार स्वभाव की हैं और राजपरिवार की पृष्ठभूमि होने के कारण वे कड़ी टक्कर देती नजर आ रही हैं। यहां दिलचस्प मुकाबला इस मायने में हो रहा है कि वीडी खजुराहो को भाजपा का गढ़ बनाये रखने में सफल होते हैं या फिर कविता सिंह उसमें सेंध लगा देती हैं।

सुबह सबेरे से साभार

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