व्यापमं घोटाला: मंत्री और अफसरों के गठजोड ने की मनमानी

भोपाल: देश का बहुचर्चित घोटाला व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में प्रदेश के तत्कालीन तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के साथ अफसरों के नापाक गठजोड ने जमकर मनमानी की है। इसका खुलासा व्यापमं द्वारा 2011 में आयोजित संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा में हुए घोटाले की जांच में हुआ है। मामले की जांच उपरांत सीबीआई ने विशेष कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में यह तथ्य कोर्ट के समक्ष रखे गए है। व्यापमं के आला अफसरों और तत्कालीन तकनीकी शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के गठजोड़ ने नैतिकता को ताक पर रखकर 6 और 9 नंबर पाने वालों तक को उन्होंने शिक्षक बना दिया।

सीबीआई ने चार्जशीट में 84 ऐसे परीक्षार्थियों को उल्लेख किया है, जिनके अंक बढ़ाकर परीक्षा में पात्र किया गया। इन सभी परीक्षार्थियों में सामान्य वर्ग को 114.73 अंक और आरक्षित वर्ग को 111.31 अंक दिए गए। अंकों की इस समानता ने संदेह का घेरा बना दिया। जांच में सामने आया कि इन परीक्षार्थियों के मूल अंकों को ओएमआर शीट में बदलकर बढ़ाया गया है। इस पूरी छेड़छाड़ में मंत्री व अफसरों का पूरा गिरोह शामिल था।

सीबीआई चार्जशीट में आए चौकाने वाले तथ्य

सीबीआई ने उस एक्सलशीट को भी शामिल किया है, जिसमें 17 दलालों के नाम हैं और इन नामों में तत्कालीन मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के सामने सर्वाकि 40 परीक्षार्थी दर्शाए गए हैं। हालांकि सीबीआई इस मामले में नया कोई आरोपी नहीं बनाया है। एसटीएफ ने 77 परीक्षार्थी, 10 मध्यस्थ, और 4 रैकेटर्स समेत कुल सौ आरोपी बनाए थे, इनमें से 1 सरकारी गवाह बन गया। सीबीआई ने भी उन्हीं 99 आरोपियों को चार्जशीट में शामिल किया है। अटेर के बनयाना मोहल्ला निवासी रमेश सिंह को संविदा शिक्षक परीक्षा में 150 में से मात्र 6.24 अंक मिले थे। जिन्हें बढ़ाकर 111.31 अंक कर दिए।

रमेश पिछड़ा वर्ग से संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा 2011वर्ग तीन में बैठा था। हालांकि डीएड की अर्हता पूरी नहीं करने रमेश को नौकरी नहीं मिली। उसे 5 जून 2014 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे जमानत मिल गई। अकोदा के रहने वाले नरेंद्र सिंह यादव ने संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा में 150 में से मात्र 9.17 अंक प्राप्त किए थे। जिन्हें बढ़ाकर 111.31 अंक कर दिया गया। नरेंद्र पिछड़ा वर्ग से संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा 2011 वर्ग तीन में बैठा था। 12 वीं पास नरेंद्र को डीएड की अर्हता नहीं होने के कारण नौकरी नहीं मिली।

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