पश्चिम बंगाल: जहरीली शराब से 9 सालों में 277 लोगों की गई है जान

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से सटे नदिया जिले में एक बार फिर जहरीली देसी शराब पीने से 11 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना ने पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग समय में देसी शराब पीने से हुई सैकड़ों लोगों की मौत की यादें ताजा कर दी है। दरअसल राज्य में पिछले 9 सालों में 270 लोगों की मौत देशी शराब पीने से हुई है। पश्चिम बंगाल में इसे चुल्लू के नाम से जाना जाता है। पांच रुपये में एक ग्लास मिलता है, जिस का नशा राम्या व्हिस्की की एक लीटर बोतल से भी ज्यादा होता है।

गुरुवार को राज्य आबकारी विभाग की ओर से बताया गया है कि 2009 के मई महीने में पूर्व मेदिनीपुर जिले के तमलुक ब्लॉक स्थित रामतारक क्षेत्र में इसी तरह से देशी शराब पीने से 48 लोगों की मौत हो गई थी। पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद दी थी। मामले में अभी तक गिरफ्तार किए गए दोषियों के खिलाफ जिला न्यायालय में सुनवाई चल रही है।

सबसे बड़ी घटना कोलकाता से सटे दक्षिण 24 परगना के संग्रामपुर में घटी थी। यहां दिसंबर 2011 में इसी तरह से जहरीली देशी शराब पीने से 173 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे देश में कोहराम मचा दिया था। तब पश्चिम बंगाल में तृणमूल की नई सरकार बनी थी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी थी। घटना की जांच सीआईडी को सौंपी गई थी। इस मामले में तीन अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे। इनमें से एक मामले में गिरफ्तार किए गए चार लोगों को जिला न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। दूसरे मामले में आरोपित सारे लोगों की मौत हो चुकी है और तीसरे मामले की सुनवाई अभी भी चल रही है।

इसके बाद बीरभूम जिले के तारापीठ में भी इसी तरह से जहरीली शराब पीने से दिसंबर 2013 में 8 लोगों की मौत हो गई थी। उस दौरान राज्य सरकार ने किसी को आर्थिक मदद नहीं दी थी। मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपितों को तीन महीने जेल की सजा दी गई थी। इसके बाद तीन साल पहले सितंबर 2015 में पूर्व मेदिनीपुर के मोयना में भी इसी तरह से जहरीली देसी शराब पीने से 25 लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में अभी भी सुनवाई चल रही है। इस घटना ने भी राज्य की राजनीति में कोहराम मचाया था क्योंकि चंद महीनों बाद ही विधानसभा चुनाव होना था और विपक्ष ने खूब हंगामा किया था। इस घटना के ठीक तीन महीने बाद दिसंबर 2015 में एक बार फिर दक्षिण 24 परगना के कैनिंग में जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर दो लोगों को गिरफ्तार किया था।

इस साल जनवरी महीने में पूर्व बर्दवान के गलसी में भी आठ लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हुई थी। मृतकों के परिजनों को पश्चिम बंगाल सरकार ने दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी थी। अब एक बार फिर नवंबर महीने की 28 तारीख को नदिया जिले के शांतिपुर में जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत हो चुकी है। आठ लोगों की मौत बुधवार शाम तक हो गई थी और तीन की मौत भी गुरुवार सुबह तक हो गई है। मामले में 19 लोगों की हालत गंभीर है। सीआईडी ने चार आरोपितों को गिरफ्तार भी किया है जिनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई है।

राज्य के आबकारी मंत्री अमित मित्रा का कहना है कि नदिया जिले में देशी शराब का ठेका चलने की कोई सूचना नहीं मिली है। प्राथमिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि इसे सीमावर्ती राज्यों यानी झारखंड या बिहार से लाया गया था। हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि नदी पार कर पूर्व बर्दवान के कालना से ही देशी शराब की खेप लाई गई थी जिसे पीने से लोगों की मौत हुई है। घटना के बाद आबकारी विभाग ने दो अधिकारियों समेत 10 कर्मचारियों को सस्पेंड किया है। मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक मदद भी दी गई है।

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