आप का क्या होगा?

द लखनऊ ट्रिब्यून ब्यूरो : आम आदमी पार्टी के 2० विधायकों को चुनाव आयोग द्बारा अयोग्य करार दिए जाने के बाद अब सभी की निगाहें राष्ट्रपति पर लगी हैं। दरअसल, आयोग के इस फैसले पर अंतिम मुहर राष्ट्रपति को ही लगानी है। लिहाजा निगाहें उन पर टिकी हैं।

लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग ने अपना यह फैसला सुनाया है। आप सरकार के तीन वर्ष पूरे होने से पहले ही पार्टी और सरकार के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। इस फैसले को आप सरकार के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में यदि राष्ट्रपति चुनाव आयोग के फैसले पर ही अंतिम मुहर लगा देते हैं तो उसके विधायकों की संख्या 46 रह जाएगी।

गौरतलब है कि इस मामले की जांच राष्ट्रपति के निर्देश पर ही हो रही थी। जिसके बाद चुनाव आयोग ने आप के 21 विधायकों को लाभ का पद मामले में कारण बताओ नोटिस दिया था। इस मामले में पहले 21 विधायकों की संख्या थी, लेकिन जरनैल सिंह पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। आप विधायकों को अयोग्य करार देने के लिए एक वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास शिकायत की थी। यह पूरा मामला आप द्बारा अपने 2० विधायकों को संसदीय सचिव बनाने से जुड़ा है।
प्रशांत पटेल ने पहुंचाया आप को इस स्थिति में
आम आदमी पार्टी के 2० विधायकों को इस हालत में लाने वाले शख्स का नाम है प्रशांत पटेल। प्रशांत की वजह से ही आम आदमी पार्टी के 2० विधायकों की सदस्यता पर पिछले तकरीबन दो साल से खतरा मंडरा रहा था। दरअसल, एक एनजीओ की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में इस नियुक्ति को चुनौती दी गई, जिसमें कहा गया था कि संसदीय सचिव के पद पर आप के 21 विधायकों की नियुक्ति असंवैधानिक है। इसके बाद वकील प्रशांत पटेल ने राष्ट्रपति के पास एक याचिका लगाई थी।

इन्हीं प्रशांत पटेल की याचिका पर केजरीवाल को झटका लगा था। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के खिलाफ फैसला दिया था। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने 2०15 में अलग-अलग विभागों में कामकाज का जायजा लेने के लिए संसदीय सचिवों की नियुक्ति की थी। ये नियुक्ति शुरुआत से ही विवादों में रही।

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