क्या मुलायम के सपनों का तारा बन सकेंगे अखिलेश ?

अश्वनी श्रीवास्तव
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव के अधूरे सपनों को क्या उनके पुत्र अखिलेश यादव पूरा करेंगे. दरअसल नेताजी मुलायम सिंह ने यूपी की राजनीति के दौरान कुछ सपनों को संजोया था. और उन्हें यह उम्मीद ही नहीं विश्वास भी था कि उनके बाद उनका बेटा अखिलेश उनके अधूरे राजनैतिक सपनों को पूरा करेगा, लेकिन मुलायम के प्रदेश से राजनीति छोड़ते ही बेटे अखिलेश ने उनके अधूरे सपनों को दरकिनार कर दिया. जिसके चलते अब सवाल इस बात का उठ रहा है कि क्या पिता मुलायम के अधूरे सपनों को पूरा कर बेटा अखिलेश यादव उनके सपनों का तारा बनेंगे.

गौरतलब है कि पिछले दिनों सपा घराने में मचे घमासान के दौरान पिता मुलायम ने बेटे अखिलेश पर इस बात को लेकर नाराजगी भी प्रकट की थी कि पार्टी का जनाधार समाप्त होता जा रहा है. सपा पार्टी के विस्तार पर अखिलेश ध्यान नहीं दे रहे हैं. जबकि पार्टी को आगे बढ़ाने में उन्होंने दिन रात एक कर दिए. दरअसल मुलायम का यह सपना था कि समाजवादी पार्टी को धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाये. उनके इस प्रयास का नतीजा था कि कुछ राज्यों में सपा की धाक जम गई थी.लेकिन उनके प्रदेश कि राजनीति से हटते ही अखिलेश ने अपने मन मुताबिक पार्टी को चलाना शुरू कर दिया. जिसके चलते कई पडोसी राज्यों में हो रहा पार्टी का विस्तार थम सा गया. इसको लेकर सपा के संस्थापक रहे मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश से बेहद नाराज बताये जाते हैं.

सपा सूत्रों के मुताबिक यूपी विधानसभा चुनाव हारने के बाद अखिलेश यादव ने पिता मुलायम कि इस नाराजगी को दूर करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. यही नहीं उनके समझ में अब अपने पिता मुलायम कि यह बात समझ में आ चुकी है कि अगर वह उनके बताये रास्ते पर चलते हैं तो भविष्य में उनको ही इसका लाभ मिलेगा. इसी को लेकर उन्होंने 5 सीटों को छोड़कर गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन बरकरार रखा. अखिलेश ने गुजरात की पांच विधानसभा सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में उतारे. अखिलेश यूपी से सटे मध्य प्रदेश राज्य में भी अपनी पार्टी के उम्मीदवार आगामी विधानसभा चुनाव में उतार सकते हैं.

सूत्रों के मुताबिक मुलायम ने यूपी के मुख्यमंत्री रहते हुए एमपी में अपनी पार्टी को स्थापित करने की घुसपैठ बनानी शुरू कर दी थी. यहां तक उन्हें कुछ हद तक इस कार्य में सफलता भी मिल गयी थी. लेकिन यूपी की सत्ता की कमान बेटे अखिलेश को सौंपने के बाद से उनका यह सपना महज एक ख्वाब बनकर रह गया. जिसके चलते पार्टी का सिर्फ राज्य स्तरीय दर्जा देखकर उनकी नाराजगी बेटे अखिलेश से बढ़ गयी. बहरहाल पिता मुलायम कि यह बात अब अखिलेश कि समझ में अच्छी तरह से आ चुकी है कि अगर देश के सिंहासन पर राज्य करना है तो पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना आवश्यक होगा तभी कुछ हो सकता है.

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