श्रीलंका में अब महिलाएं भी खरीद सकेंगी शराब, 60 सालों से लगा था प्रतिबंध 

कोलंबो: महिलाओं के शराब खरीदने पर श्रीलंका में लगी रोक अब हटा ली गई है। यहां अब महिलाएं भी दुकानों से शराब खरीद पाएंगी। इस पर पिछले 60 सालों से रोक लगी हुई थी। सरकार ने यह स्वीकार किया है कि इस कानून में महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया है और औरतों के ऊपर लगा यह प्रतिबंध हटाया जाएगा। 1955 में बना कानून श्रीलंका की महिलाओं को शराब खरीदने और शराब की दुकान में काम करने से रोकता था।

मालूम हो कि श्रीलंका के राष्ट्रपति मैथ्रिपाला सिरिसेना ने हाल ही में बयान दिया था कि श्रीलंका की औरतों में शराब सेवन बढ़ गया है। ऐसे में सरकार की ओर से हटाया गया यह बैन महिलाओं के लिए खुशी की वजह बन गया है। इसलिए भी क्योंकि अब महिलाएं शराब की दुकानों पर काम भी कर पाएंगी। वैसे शराब सेवन को लेकर अगर दुनिया भर के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पुरुष-महिला के बीच शराब सेवन का फासला कम होता जा रहा है।  यह शराब सेवन पर शोध करने वाली यूके की संस्था आईएएस का कहना है।

भारत की बात करें तो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे कहता है कि 2005-2006 से लेकर 2015-16 के बीच दस सालों में भारत में शराब सेवन करने वाली महिलाओं की तादाद 1 फीसदी बढ़ी है। राजधानी दिल्ली में यह संख्या ।3 फीसदी  से बढ़ी है। वैसे गोवा, चंडीगढ़, केरल, आंध्रप्रदेश, मणिपुर, मिज़ोरम में भी शराब पीने वाली महिलाओं की संख्या दिल्ली से भी ज्यादा बढ़ी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में असम की महिलाएं शराब सेवन में सबसे आगे हैं, वहीं राजस्थान सबसे आखिर में आता है। मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक और पेशेवर परिस्थितियां और पुरुषों के साथ और अधिक संवाद बैठाने ने महिलाओं के शराब पीने को समाज के सामने भी सहज कर दिया है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper