नए तेवर में यशवंत सिन्हा, जानिये क्या मिलेगा सोमनाथ चटर्जी का साथ

अखिलेश अखिल
किसी से कोई यूँ ही मुलाक़ात नहीं करता। और राजनीतिक लोग तो और भी नहीं। इनकी मुलाकात के कुछ मायने होते हैं और उस मुलाकात में राजनितिक रस भी। जब दो विरोधी नेता आपस में जुगलबंदी करते हैं तो राजनीतिक गतिविधियां बढ़ जाती है और एक नयी धारा के साथ नए मिजाज का अवतरण होता है। राजनीति का रसायन शात्र तो यही कहता है। क्या 80 की उम्र में भी कोई राजनीति करता है ? बहुत ही कम लोग। और ऐसा होता दिखता है तो यह बड़ी बात है। जाहिर है ऐसे लोग देश की मौजूदा राजनीति से खुश नहीं होते और उन्हें लोकतंत्र को बचाने और उसे मजबूत करने के लिए कुछ करने की जरूरत पड़ती है। यशवंत सिन्हा कुछ ऐसे दिख रहे हैं।

उन्होंने राजनीतिक मंच बनाया, जिसे ‘राष्ट्रीय मंच’ का नाम दिया है। इस मंच से कई पार्टियों से नाराज और दिग्गज नेता जुड़े। शत्रुघ्न सिन्हा, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व असंतुष्ट जदयू नेता उदय नारायण चौधरी, पवन कुमार वर्मा समेत कई लोग साथ आ गये हैं। रविवार को उदय नारायण चौधरी ने दिग्गज वाम नेता सोमनाथ चटर्जी से मुलाकात की है, जिसके बाद यह संभावना तलाशी जा रही है कि क्या यशवंत सिन्हा की मुहिम को सोमनाथ चटर्जी का साथ मिलेगा। राष्ट्र मंच आगामी 23 फरवरी को दिल्ली में किसानो की समस्यायों पर बड़ा आयोजन करने जा रहा है और माना जा रहा है कि देश भर के किसान इस मंच के साथ जुड़ेंगे और सरकार की मौजूदा किसान नीति पर हमला करेंगे। जो होगा उसे देखा जाएगा लेकिन यहां तो सबसे बड़ी बात उदय नारायण चौधरी और सोमनाथ चटर्जी के मुलाक़ात के मायने को लेकर हैं।

खबर यह है कि उदय नारायण चौधरी और पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी की कोलकाता में हुई। इस मुलाकात के कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हुई है कि यह कोशिश सोमनाथ दा को साथ लाने की और उनका नैतिक समर्थन हासिल करने का है। मंच खुद को मजबूत करने की कोशिश में लगा है और दिग्गज बुजुर्ग या उपेक्षित नेताओं को एक साथ लाने की कोशिश कर रहा है। सोमनाथ के संदेश को उनके इस मंच के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। मुलाकात के दौरान चटर्जी ने चौधरी से आह्वान किया कि देश को बचाइये। उदय नारायण चौधरी वंचित वर्ग मोर्चा बना कर सक्रिय हैं और पिछले दिनों वे बापू की पुण्यतिथि के दिन राजघाट साथ श्रद्धांजलि देने गये थे। अब देखना है कि सोमनाथ चटर्जी से हुयी मुलाक़ात के बाद राष्ट्र मंच की राजनीति कितनी सबल हो पाती है।

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