‘YRF50 की कामयाबी का श्रेय लोगों को जाता है: आदित्य चोपड़ा

आदित्य चोपड़ा कहते हैं कि: ‘YRF50 की कामयाबी का श्रेय लोगों को जाता है!’ और वह इसके लिए पूरी फिल्म इंडस्ट्री के अलावा उन सभी लोगों का भी शुक्रिया अदा करते हैं, जो 50 सालों के इस शानदार सफ़र के दौरान भारत के सबसे बड़े प्रोडक्शन हाउस, यानी यशराज फ़िल्म्स के साथ जुड़े रहे।

1970 में, मेरे पिता यश चोपड़ा ने अपने भाई श्री. बी.आर. चोपड़ा की छत्र-छाया की सुरक्षा को त्याग कर अपनी ख़ुद की कंपनी बनाई. उस समय तक, वह बी.आर. फ़िल्म्स के केवल एक मुलाज़िम थे और उनके पास अपना कोई सरमाया नहीं था. वह नहीं जानते थे कि एक कारोबार कैसे चलाया जाता है. उन्हें इस बात की भी ख़बर नहीं थी कि एक कंपनी चलाने के लिए किन चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है.

उस समय यदि उनके पास कुछ था, तो अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत पर दृढ़ विश्वास और आत्म-निर्भर बनने का एक ख़्वाब. एक रचनात्मक व्यक्ति के उसी संकल्प ने यश राज फ़िल्म्स को जन्म दिया. राजकमल स्टूडियो के मालिक श्री. वी. शान्ताराम ने उन्हें उनके दफ़्तर के लिए अपने स्टूडियो में एक छोटा सा कमरा दे दिया. तब मेरे पिताजी को यह नहीं मालूम था कि उस छोटे से कमरे में शुरू की गई वह छोटी सी कंपनी एक दिन भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी फ़िल्म कंपनी बन जाएगी.

1995 में, जब यश राज फ़िल्म्स (YRF) ने अपने 25 वें वर्ष में कदम रखा, तो मेरी पहली फ़िल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे रिलीज़ हुई. उस फ़िल्म की ऐतिहासिक सफलता ने मेरे अंदर वह आत्म-विश्वास जगाया कि मैं जुनून से भरे अपने उन आइडियाज़ को परवाज़ दूं जो मैंने YRF के भविष्य के लिए सोच रखे थे. मेरे प्रति मेरे पिता के असीम प्यार के अलावा, मेरी फ़िल्म की चमत्कारिक सफलता के कारण अब उन्हें मेरे विचारों पर भी बहुत विश्वास था. मैंने अंतर्राष्ट्रीय कॉर्पोरेट स्टूडियोज़ के भारत आने और हमारे कारोबार पर क़ब्ज़ा जमा लेने की बात को पहले ही भांप लिया था. मैं चाहता था कि हम उनके आने से पहले ही एक ऐसा निश्चित स्केल प्राप्त कर लें जिसकी सहायता से अपनी स्वतंत्रता को कायम रखा जा सके. मेरे पिता ने अपनी पारंपरिक मानसिकता के विपरीत बड़ी बहादुरी से मेरी सभी साहसिक पहलों की सराहना की. और 10 वर्ष की एक इंतेहाई छोटी अवधि में, हम एक फ़िल्म प्रोडक्शन हाउस से भारत के पहले पूरी तरह से एकीकृत स्वतंत्र फ़िल्म स्टूडियो बन गए.

पिछले 5 दशकों के दौरान, YRF मूल रूप से एक ऐसी कंपनी रही है जिसकी जड़ें पारंपरिक मूल्यों में नीहित हैं और उसका व्यापारिक दृष्टिकोण शुद्धतावादी है. लेकिन इसके साथ ही यह भविष्य की ओर देखने वाली एक ऐसी दिलेर कंपनी भी है, जो वर्तमान समय की प्रचलित टेक्नॉलोजी और इनोवेशन्स को अपनाने के लिए लगातार प्रयास करती रहती है. परंपरा और आधुनिकता का यह सही संतुलन यश राज फ़िल्म्स को सही मायनों में परिभाषित करता है.

आज, यश राज फ़िल्म्स 50 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. इसलिए, इस नोट को लिखते समय, मैं यह जानने का प्रयास कर रहा हूं कि आख़िर इन 50 वर्षों की कामयाबी का राज़ क्या है? क्या यह यश चोपड़ा की रचनात्मक प्रतिभा है? क्या यह उनके 25 साल के ज़िद्दी बेटे का साहसिक विज़न है? या ऐसा बस क़िस्मत से हो गया है?
इनमें से कोई भी कारण नहीं है.
इस कामयाबी का कारण हैं… लोग.
वो लोग जिन्होंने पिछले 50 वर्षों में YRF की हर फ़िल्म में काम किया.
मेरे पिताजी एक शायर की कुछ पंक्तियों से अपने सफ़र का वर्णन किया करते थे:-
मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर … लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया
मुझे इस बात को पूरी तरह समझने में 25 साल लग गए. YRF 50 का राज़ लोग हैं…

वो कलाकार जिन्होंनें अपनी रूह निचोड़ कर किरदारों में जान डाली.
वो डायरेक्टर्स जिन्होंने अपनी फ़िल्मों को परफ़ेक्शन दी.
वो लेखक जिन्होंने यादगार कहानियाँ लिखीं.
वो संगीतकार और गीतकार जिन्होंने हमें ऐसे गीत दिए जो हमारे जीवन का हिस्सा बन गए.
वो सिनेमेटोग्राफ़र्स और प्रोडक्शन डिज़ाइनर्स जिन्होंने हमारे दिमाग़ों पर कभी न मिटने वाले दृश्य छोड़े.
वो कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर्स, मेक-अप और हेयर स्टाइलिस्ट्स जिन्होंने साधारण दिखने वालों को भी हसीन बना दिया.
वो कोरियोग्राफ़र्स, जिन्होनें हमें ऐसे डान्स स्टेप्स दिए जो हमारे सभी समारोहों का हिस्सा हैं.
वो स्पॉट-ब्वायज़, लाइटमेन, सेटिंग वर्कर्स, ड्रेसमेन, जुनियर आर्टिस्ट, स्टंटमेन, डांसर्स और क्रू का हर सदस्य जिसने हमारी सभी फ़िल्मों के लिए अपना ख़ून और पसीना बहाया.
वो सीनियर एक्ज़ेक्टिव्ज़ और YRF के वो सभी कर्मचारी जिन्होंने किसी व्यक्तिगत नामवरी या शौहरत की ख़्वाहिश के बिना अनथक मेहनत की.
और अंत में, दर्शक, जिन्होंने हमारी फ़िल्मों को अपना प्यार और विश्वास दिया.
ये लोग हमारी 50 साल की सफलता का राज़ हैं.
मैं YRF के हर कलाकार, वर्कर, कर्मचारी और दर्शक के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूँ.
मैं ये 50 वर्ष आप सभी को समर्पित करता हूँ. आप हैं, तो YRF है.

लेकिन इन कलाकारों और वर्कर्स ने केवल YRF को ही नहीं, ब्लकि पूरी भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री को बनाया है. यह केवल YRF की नहीं, बल्कि पूरी भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री की सफलता है, जिसने अपनी मेहनत से सफल होने का ख़्वाब देखने वाले एक व्यक्ति को दुनिया का एक आत्म-निर्भर और सही अर्थों में स्वतंत्र स्टूडियो बनाने का प्लेटफ़ॉर्म दिया. यह एक ऐसी इंडस्ट्री है जो हर कलाकार और वर्कर को अपने और अपने परिवार का जीवन संवारने का समान अवसर देती है. कलाकारों, वर्कर्स और कर्मचारियों के अपने संपूर्ण YRF परिवार की ओर से, YRF को इस महान विरासत का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करने के लिए, मैं भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री का शुक्रिया अदा करता हूँ. यह वह इंडस्ट्री है जहां मेरी मुलाक़ात इंतेहाई शानदार, प्रतिभाशाली और ख़ूबसूरत लोगों से हुई. यह वह इंडस्ट्री है जिसका मैं हर जनम में हिस्सा बनना चाहूंगा… चाहे किसी भी रूप में बनूँ.

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