Monday, September 7, 2026
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नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतों से मचा हाहाकार; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

काठमांडू: नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव अभियान दूसरे सप्ताह में पहुंच गया है, लेकिन तबाही का असर लगातार सामने आ रहा है। अब तक 960 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4 हजार से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। कई प्रभावित इलाकों में शवों के सड़ने और दुर्गंध फैलने से संक्रमण और महामारी का खतरा बढ़ गया है। मलबे और दलदल में दबे शवों को बाहर निकालना भी बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में राहत अभियान के साथ प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और संक्रमण की रोकथाम पर भी जोर दिया जा रहा है।

ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़
यह आपदा पिछले बुधवार को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद शुरू हुई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी चट्टानों और मलबे के साथ पहाड़ों से नीचे आया और रास्ते में पड़ने वाले गांवों तथा कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया।
तेज बहाव के कारण कई जगह घर और सड़कें बह गईं। बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए या बाढ़ के पानी में बह गए। भारत में भी बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई कम से कम 17 लाशें बरामद की जा चुकी हैं।

शवों के सड़ने से बढ़ा संक्रमण का खतरा
आपदा के करीब एक सप्ताह बाद कई प्रभावित इलाकों में शवों के सड़ने से दुर्गंध फैलने लगी है। मलबे और कीचड़ में फंसे शवों को निकालने में लग रहा समय अब स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर रहा है।
प्रशासन को एक साथ दो मोर्चों पर काम करना पड़ रहा है। एक ओर मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने और संभावित संक्रमण को फैलने से रोकने की चुनौती है।

सुरंगों में फंसे करीब 100 कर्मचारियों की तलाश
नेपाल के रसुवा जिले में करीब 100 जलविद्युत परियोजना कर्मचारियों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल मोटी मिट्टी और मलबे को हटाकर सुरंगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
अब तक दो सुरंगों से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं। एक भारतीय सेना अधिकारी के मुताबिक, बचाव टीमें लगातार भारी कीचड़ और मलबा हटाकर आगे बढ़ रही हैं। हालात बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन राहतकर्मियों को अभी भी कुछ लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद है।
नेपाल ने राहत और बचाव अभियान में करीब 20,600 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को लगाया है। अब तक 3,100 से अधिक लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।

शवगृहों में जगह कम पड़ी, अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा
बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण नेपाल में शवगृहों की क्षमता कम पड़ने लगी है। अज्ञात शवों के डीएनए नमूने लेने के बाद उन्हें दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर शवों को उनके परिवारों को सौंपा जा सके।
लापता लोगों के परिजन सामुदायिक केंद्रों में पहुंचकर बरामद शवों की तस्वीरें देख रहे हैं। कई परिवार अभी भी अपने रिश्तेदारों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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1000 से ज्यादा फ्रीजर इकाइयों की जरूरत
नेपाल सरकार ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक शवों को संरक्षित रखने के लिए 1,000 से अधिक फ्रीजर इकाइयों की जरूरत है।
वहीं, लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे बचाव अभियान और शवों की पहचान की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

रेस्क्यू के साथ स्वास्थ्य संकट से निपटना भी बड़ी चुनौती
नेपाल में राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ आपदा की गंभीरता के नए पहलू सामने आ रहे हैं। हजारों लोगों की तलाश अभी बाकी है और सुरंगों में फंसे कर्मचारियों तक पहुंचने की कोशिश लगातार जारी है। दूसरी ओर शवों के सड़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ता जा रहा है।
अब नेपाल के सामने केवल लापता लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने की चुनौती नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखना, शवों का सुरक्षित निस्तारण करना और संभावित महामारी के खतरे को रोकना भी राहत अभियान का अहम हिस्सा बन गया है।

 

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