Sunday, September 6, 2026
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धर्म

श्रीकृष्ण को ही क्यों लगाया जाता है 56 भोग? गोवर्धन पर्वत से कमल की 56 पंखुड़ियों तक, जानिए क्या हैं 3 बड़ी मान्यताएं

नई दिल्ली: जन्माष्टमी और अन्नकूट जैसे पर्वों पर भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसमें मिठाइयों से लेकर नमकीन, फल, पेय और अलग-अलग तरह के पारंपरिक पकवान शामिल किए जाते हैं। खास बात यह है कि भगवान कृष्ण के भोग में 56 व्यंजनों की संख्या विशेष रूप से निर्धारित मानी जाती है। धार्मिक परंपराओं में इसके पीछे कई कथाएं और मान्यताएं बताई गई हैं। इनमें तीन प्रमुख मान्यताएं सबसे ज्यादा प्रचलित हैं।

पहली मान्यता: गोवर्धन पर्वत और सात दिन का उपवास

पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता यशोदा बाल कृष्ण को दिन में आठ प्रहर भोजन कराया करती थीं। जब देवराज इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली पर उठा लिया था, तब वह लगातार सात दिनों तक अन्न और जल ग्रहण किए बिना रहे।

मान्यता है कि सात दिन बाद जब बारिश थमी और भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा, तब ब्रजवासियों और माता यशोदा ने उन सात दिनों में आठों प्रहर दिए जाने वाले भोजन को एक साथ भगवान को अर्पित किया। इस तरह सात दिन और आठ प्रहर का गुणा करने पर 56 भोग की संख्या बनी। इसी घटना को छप्पन भोग की परंपरा की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है।

दूसरी मान्यता: राधा-कृष्ण के दिव्य कमल की 56 पंखुड़ियां

एक अन्य धार्मिक मान्यता गोलोक से जुड़ी है। इसके अनुसार, भगवान कृष्ण राधा जी के साथ जिस दिव्य कमल पर विराजमान होते हैं, उसमें 56 पंखुड़ियां होती हैं। इस कमल को तीन परतों वाला बताया गया है।

मान्यता के मुताबिक पहली परत में आठ, दूसरी में 16 और तीसरी परत में 32 पंखुड़ियां होती हैं। तीनों की संख्या जोड़ने पर 56 होती है। इसी आधार पर भी भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा बताए जाने का उल्लेख मिलता है।

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तीसरी मान्यता: गोपिकाओं ने अर्पित किया था छप्पन भोग

छप्पन भोग को लेकर एक अन्य मान्यता श्रीमद्भागवत से जुड़ी कथा में मिलती है। इसके अनुसार, भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने की इच्छा से गोपिकाओं ने एक महीने तक व्रत रखा और भोर के समय यमुना में स्नान कर कात्यायिनी माता की पूजा-अर्चना की।

कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने गोपिकाओं की मनोकामना पूरी करने की सहमति दी, तो वे प्रसन्न हुईं और उन्होंने 56 प्रकार के व्यंजन तैयार करके भगवान कृष्ण को अर्पित किए। इस मान्यता को भी छप्पन भोग की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।

प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है छप्पन भोग

धार्मिक मान्यताओं में छप्पन भोग को भगवान कृष्ण के प्रति भक्तों के प्रेम, कृतज्ञता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। 56 की संख्या को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं। जन्माष्टमी के साथ-साथ अन्नकूट पर्व पर भी भगवान श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा आज तक जारी है।

 

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