रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय में पंडित राधेश्याम मिश्र कथावाचक की 135वीं जयंती धूमधाम से सम्पन्न

बरेली , 26 नवंबर। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित पंडित राधेश्याम मिश्र कथावाचक शोधपीठ के तत्वावधान में कल महान कथावाचक पंडित राधेश्याम मिश्र की 135वीं जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनायी गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने की, जबकि डॉ. शारदा भार्गव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। विशेष अतिथि के रूप में श्री विक्रम भार्गव तथा श्री संजय भार्गव मंचासीन रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं संयोजन शोधपीठ की समन्वयक डॉ. अनीता त्यागी ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित राधेश्याम मिश्र के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। तत्पश्चात सभी अतिथियों ने उनके जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व से जुड़े संस्मरण सुनाए और उन्हें भारतीय कथा परंपरा का सशक्त स्तंभ बताया।
मुख्य अतिथि डॉ. शारदा भार्गव, जो पंडित राधेश्याम मिश्र की पोती हैं, ने भावुक होते हुए अपने दादाजी से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए। उन्होंने उनके संघर्षपूर्ण जीवन, कथावाचन की अद्वितीय शैली तथा समाज और राष्ट्र के लिए किए गए योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. भार्गव ने बताया कि वे पंडित राधेश्याम मिश्र से संबंधित समस्त पांडुलिपियों, पुस्तकों, तस्वीरों और अन्य सामग्री को एक स्थान पर संकलित कर एक विशेष स्मृति–कक्ष (हॉल) बनाने की दिशा में कार्य कर रही हैं, ताकि छात्र, शोधार्थी और आमजन उन्हें और करीब से जान–समझ सकें।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि पंडित राधेश्याम मिश्र ने अपनी ओजस्वी कथावाचन-शैली के माध्यम से न केवल धार्मिक आख्यानों को नया आयाम दिया, बल्कि सामाजिक चेतना और देशभक्ति की भावना को भी जन-जन तक पहुँचाया।
कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालय में इस शोधपीठ की स्थापना, भारतीय कथावाचन परंपरा के गंभीर अकादमिक अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे पंडित जी के साहित्य, भाषिक शैली और सांस्कृतिक योगदान पर गहन शोध कार्य करें।
समन्वयक एवं कार्यक्रम संयोजिका डॉ. अनीता त्यागी ने अपने वक्तव्य में पंडित राधेश्याम मिश्र को “जन-जन के कथावाचक” की संज्ञा देते हुए कहा कि उनकी जयंती मनाना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक स्मृति को जीवित रखने का संकल्प है। उन्होंने यह भी कहा कि शोधपीठ का उद्देश्य पंडित जी के विचारों और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना, कथावाचन की विधा पर शोध को प्रोत्साहित करना तथा समय-समय पर व्याख्यानमाला, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करना है।
समारोह के अंत में प्रो. पी. बी. सिंह, अधिष्ठाता विद्यार्थी कल्याण (DSW) ने औपचारिक धन्यवाद–ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. शारदा भार्गव, विशिष्ट अतिथियों श्री विक्रम भार्गव एवं श्री संजय भार्गव, कुलपति प्रो. के. पी. सिंह, कार्यक्रम संयोजिका डॉ. अनीता त्यागी तथा उपस्थित सभी विद्वानों, शोधार्थियों और छात्रों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आभा त्रिवेदी ने अत्यंत प्रभावशाली एवं सधे हुए अंदाज़ में किया। उन्होंने पूरी श्रृंखला को सुव्यवस्थित रूप से जोड़ते हुए, अतिथियों का परिचय, वक्ताओं का आमंत्रण और विभिन्न चरणों का संयोजन निरंतर किया, जिससे पूरा आयोजन अनुशासित, गरिमापूर्ण और रोचक बना रहा।
कार्यक्रम में पंडित राधेश्याम मिश्रा कथावाचक शोधपीठ में सह समन्वयक डॉ ज्योति पाण्डेय, डॉ अजित, डॉ आभा त्रिवेदी, विश्वविद्यालय के कुल सचिव श्री हरीश चंद, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी व विधार्थी उपस्थित रहे l कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को अंग वस्त्र भेंट किए गए और धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

