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कोटा में 8 लाइन पर भीषण हादसा : दिल्ली से इंदौर जा रही बस ट्रक में जा घुसी, 2 की मौत, 12 यात्री घायल

कोटा। तड़के करीब 4:30 बजे, 8 लाइन पारलिया पर उस समय दर्द और दहशत का मंज़र बन गया, जब दिल्ली से इंदौर जा रही प्राइवेट स्लीपर बस अचानक सामने चल रहे वाहन में घुस गई। कल्पना ट्रेवल्स की इस वीडियो कोच बस में क़रीब 42 यात्री सवार थे, जिनमें से कई उस वक्त गहरी नींद में थे। हादसा इतना भयावह था कि बस का आगे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दो ड्राइवरों की मौके पर ही मौत हो गई। एक ड्राइवर का शव बस में बुरी तरह फँस गया, जिसे निकालने में देर तक मशक्कत करनी पड़ी। कैसे हुआ हादसा? : कैथून थाना सीआई संदीप शर्मा के अनुसार बस अरण्ड़खेड़ा के पास एक अज्ञात वाहन से टकराई। एडिशनल एसपी कोटा ग्रामीण राम कल्याण मीणा का कहना है कि संभावना है—रात का समय था, ड्राइवर को झपकी लगी और बस आगे चल रहे ट्रक में जा भिड़ी।

मौत के साए : हादसे में जिन दो ड्राइवरों ने अपनी जान गंवाई — गिर्राज रेबारी (40), श्याम सुंदर सेन, दोनों ने यात्रियों को सुरक्षित मंज़िल पर पहुँचाने का बीड़ा उठाया था, पर मौत ने उनसे पहले ही रास्ता छुड़ा लिया।
घायलों का उपचार जारी

न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है।डॉ. रमाकांत के अनुसार — 12 यात्री घायल हैं, जिनमें 8 पुरुष, 4 महिलाएंशामिल हैं। अधिकांश को सिर, पैर और शरीर के ऊपरी हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं।
घायलों की सूची : अनीता रस्तोगी (53) मेरठ, सौरव रस्तोगी (27) मेरठ, गौरव रस्तोगी (25) मेरठ, अजीत सिंह (40) सोनीपत, अविनाश जाटव (37) इंदौर, प्रियंका जाटव (32) इंदौर, मोहित कक्कड़, फरीदाबाद, चांदनी (30) रोहिणी दिल्ली, सरोज (48) नबे सराय दिल्ली, किशन जैन (50) नबे सराय दिल्ली, विक्की (20) मंडाना कोटा, देवेंद्र बघेल (28) माधो नगर उज्जैन।
यात्रियों की दहशत : एक यात्री ने रोते हुए बताया—हम सब सो रहे थे… अचानक ज़ोरदार झटका लगा… कोई चीख रहा था, कोई खून से लथपथ था… बस का आगे का हिस्सा चकनाचूर हो चुका था। बस रात 9 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी। कुछ ही घंटों बाद सड़क पर यह दर्दनाक मंज़र बन गया।
समापन (टीवी पैकेज क्लोजिंग लाइन)
सफर पर निकले दर्जनों मुसाफ़िरों के लिए यह रात नींद से जागने का नहीं, दर्द से जागने का समय बन गई। दो परिवारों में सन्नाटा है, और 12 घायल ज़िन्दगी की लड़ाई लड़ रहे हैं।जांच जारी है—पर सवाल वही…सड़कों पर तेज़ रफ़्तार और नींद से भरी ड्राइविंग कब तक ज़िंदगी को ऐसे लीलती रहेगी?

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