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मधुलिमये जी की समाजवादी सोच आज भी प्रासंगिक, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया: विजय कुमार लाल श्रीवास्तव

लखनऊ। समतावादी चेतना अभियान, लखनऊ के तत्वावधान में समाजवादी विचारक मधु लिमये की समाजवादी अवधारणा पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी क्लोजल अपार्टमेंट, 6-बी लेन, जोपलिंग रोड में ए.के. श्रीवास्तव की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

गोष्ठी के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय सचिव एवं समाजवादी विचारक विजय कुमार लाल श्रीवास्तव ने कहा कि आचार्य नरेंद्र देव, डॉ. राम मनोहर लोहिया और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के बाद मधु लिमये ऐसे समाजवादी नेता थे, जिन्होंने आजीवन संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने सामाजिक और आर्थिक न्याय को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और संसद में आमजन के लोकतांत्रिक अधिकारों की बुलंद आवाज बने।

विजय कुमार लाल श्रीवास्तव ने कहा कि मधु लिमये जातिवाद और सांप्रदायिकता के कट्टर विरोधी थे। वे नागरिक अधिकारों और हिंदी भाषा के प्रबल समर्थक रहे। उनकी समाजवादी अवधारणा ‘सत्यम, शिवम, सुंदरम’ पर आधारित एक समतामूलक समाज के निर्माण की थी। उन्होंने राजनीति में धर्म और जाति के प्रयोग का विरोध करते हुए लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को सशक्त करने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। वे एक महान संविधान-विशेषज्ञ और सच्चे लोहियावादी नेता थे।

विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि मधु लिमये देश के सबसे प्रभावशाली समाजवादी सांसदों में से एक थे। उनका पूरा जीवन आमजन के समग्र विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती के लिए समर्पित रहा।

गोष्ठी को योगेंद्र उपाध्याय, डॉ. सुभाष चंद्रा, भागीदारी आंदोलन के संयोजक पी.के. कुरिल, महेश पाल, राजकुमार श्रीवास्तव, सुभाष श्रीवास्तव, मनोज पटेल और बाबूलाल ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में राकेश यादव, बृजेश कुमार, संतोष कुमार सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

 

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