Chanakya Niti: पुरुषों से 8 गुना ज्यादा क्षमता, लेकिन इन 3 आदतों से रहें सावधान; आचार्य चाणक्य ने बताए स्त्रियों के गहरे राज

आचार्य चाणक्य की नीतियां सदियों बाद आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी मौर्य काल में थीं। चाणक्य नीति में न केवल राजनीति और कूटनीति, बल्कि स्त्री-पुरुष के स्वभाव और उनके गुप्त गुणों का भी सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है। चाणक्य ने महिलाओं के उन पहलुओं पर प्रकाश डाला है, जिन्हें समझकर कोई भी व्यक्ति जीवन के कठिन फैसलों में धोखा खाने से बच सकता है। इन नीतियों का उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं, बल्कि मानवीय व्यवहार की गहराई को समझाना है।

पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में होती है कई गुना अधिक शक्ति
आचार्य चाणक्य ने अपने श्लोकों के माध्यम से स्त्री शक्ति का अद्भुत वर्णन किया है। उनके अनुसार, महिलाएं शारीरिक और मानसिक रूप से पुरुषों से कहीं अधिक सामर्थ्य रखती हैं। चाणक्य नीति कहती है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में भूख दो गुना, लज्जा यानी शर्म चार गुना, साहस छह गुना और काम करने की शक्ति यानी सहनशक्ति आठ गुना अधिक होती है। यही कारण है कि महिलाएं एक साथ कई मोर्चों पर जिम्मेदारी संभालने में पुरुषों से कहीं आगे निकल जाती हैं।
स्वभाव में छिपे कुछ स्वाभाविक अवगुणों का उल्लेख
चाणक्य ने जहां महिलाओं की शक्ति की प्रशंसा की है, वहीं उनके स्वभाव से जुड़े कुछ नकारात्मक पहलुओं के प्रति भी सचेत किया है। नीति शास्त्र के अनुसार, कुछ स्त्रियों में झूठ बोलना, बिना सोचे-समझे काम करना (बेवकूफी), अत्यधिक लोभ, अपवित्रता और दयाहीनता जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। हालांकि, चाणक्य यह भी स्पष्ट करते हैं कि ये गुण हर महिला में हों ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन ये दोष समाज में कुछ महिलाओं के पतन का कारण बनते हैं।

सुंदरता नहीं, संस्कार और स्वभाव है असली गहना
रूप-रंग को लेकर भी आचार्य चाणक्य के विचार काफी कड़े थे। उनका मानना था कि अगर किसी स्त्री को अपने सौंदर्य पर अहंकार हो जाए, तो वह अपने ही पति को शत्रु समझने लगती है। ऐसी स्त्रियां अपने जीवनसाथी को खुद से नीचा आंकती हैं, जिससे वैवाहिक जीवन में दरार आ जाती है। चाणक्य के अनुसार, स्त्री की असली सुंदरता उसके तन में नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और परिवार के प्रति समर्पण में छिपी होती है। जो स्त्री अपने परिवार को जोड़कर रखती है, वही वास्तव में सुंदर और पूजनीय है।
ईर्ष्या और तुलना की भावना का मनोवैज्ञानिक सच
चाणक्य नीति में स्त्रियों के बीच होने वाली ईर्ष्या के कारणों का भी जिक्र है। आचार्य के अनुसार, गलत रास्ते पर चलने वाली स्त्री अक्सर एक चरित्रवान और पवित्र स्त्री को देखकर जलन महसूस करती है। इसी तरह, सौंदर्य की प्रतिस्पर्धा भी ईर्ष्या का बड़ा कारण बनती है। जब कोई महिला खुद से अधिक सुंदर या गुणी स्त्री को देखती है, तो उसके मन में स्वाभाविक रूप से तुलनात्मक भाव जागृत होते हैं। चाणक्य कहते हैं कि इन व्यवहारिक सचों को जानकर ही एक समझदार व्यक्ति सुखी जीवन जी सकता है।

