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हेड लाइन वाला बजट: लोकदल

लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रविवार को आया सरकार का बजट भी छुट्टी जैसा ही रहा—न जनता को राहत, न युवाओं, किसानों और गरीबों को कोई उम्मीद।
उन्होंने कहा कि यह बजट जीवन को सरल बनाने के बजाय आम जनता के लिए और अधिक कठिन बना देने वाला बजट है। महिला, युवा, किसान और मिडिल क्लास—सभी वर्गों को इस बजट से निराशा ही हाथ लगी है। सरकार के आंकड़ों में भले ही महंगाई दिखाई न दे, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आम आदमी लगातार बढ़ती कीमतों से जूझ रहा है।
लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि बजट में किसान सम्मान निधि का उल्लेख तो किया गया है, लेकिन किसानों के लिए कोई ठोस और दीर्घकालिक नीति नज़र नहीं आती। फसल की लागत, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, सिंचाई, खाद और बीज की कीमतों पर सरकार की स्पष्ट नीति का अभाव साफ दिखता है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने बजट में यह तो बताया कि खर्च कहाँ होगा, लेकिन यह नहीं बताया कि गिरते रुपये को सहारा कैसे मिलेगा। रुपये की कमजोरी, बढ़ती बेरोज़गारी और आय में ठहराव पर सरकार की चुप्पी उसकी आर्थिक विफलता को उजागर करती है।
सुनील सिंह ने कहा कि देश को चीन से सीखने की ज़रूरत है, जहाँ छोटे-छोटे उद्योगों के ज़रिये कम कीमत पर ज़रूरी चीज़ें उपलब्ध कराई जाती हैं। इसी कारण आज विश्व की निगाहें चीन के उत्पादन तंत्र पर निर्भर रहती हैं। भारत में छोटे और मझोले उद्योगों को मज़बूत किए बिना महंगाई पर काबू पाना संभव नहीं है।
यह बजट राहत का नहीं, बल्कि महंगाई की आंधी लेकर आया है। रोज़मर्रा की ज़रूरतों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती तक—हर मोर्चे पर आम आदमी पर बोझ बढ़ाया गया है। यह बजट जनहित से कटे हुए फैसलों का दस्तावेज़ है, जो देश के मेहनतकश वर्गों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता।

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