केंद्रीय बजट की अहम घोषणाओं पर विस्तृत समीक्षा, करदाता से लेकर नारी शक्ति और MSME तक दिखी मजबूत दिशा

नई दिल्ली। केंद्रीय बजट में इस बार करदाताओं, महिलाओं, छोटे उद्यमियों और समग्र अर्थव्यवस्था को लेकर कई दूरगामी और व्यावहारिक प्रावधान किए गए हैं। बजट को ईमानदार करदाताओं के लिए राहत, नारी सशक्तिकरण के विस्तार और उद्योग जगत के लिए तरलता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। ग्लोबल टैक्सपेयर्स ट्रस्ट के चेयरमैन एवं जीएसटी ग्रीवांस रिड्रेसल कमेटी उत्तर प्रदेश के सदस्य मनीष खेमका ने बजट के प्रमुख प्रावधानों को अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक बताया है।

ईमानदार करदाताओं को मिला भूल-चूक का सुरक्षा कवच
मोदी सरकार ने करदाताओं को अनावश्यक उत्पीड़न, जुर्माने और ब्याज से बचाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की है। बजट में आयकर रिटर्न से जुड़ी समय-सीमाओं में राहत, अनिवासी भारतीयों के लिए रियायतें और दंडात्मक प्रावधानों में कमी जैसे कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण पहल यह है कि आयकर सुनवाई के दौरान भी करदाता स्वयं अपना इनकम टैक्स रिटर्न सुधार सकेंगे और अधिकारियों को संशोधित रिटर्न के आधार पर ही कार्रवाई समाप्त करनी होगी। भूल-चूक सुधारने पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स देना होगा, लेकिन इसके बदले करदाता लंबी कानूनी प्रक्रिया और अनावश्यक लेन-देन से बच सकेंगे। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 से 12.75 लाख रुपये तक की आय को आयकर मुक्त किए जाने का प्रावधान नौकरीपेशा वर्ग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की नारी शक्ति को होगा सर्वाधिक लाभ
केंद्रीय बजट में नारी सशक्तिकरण को लेकर किए गए प्रावधानों का सबसे अधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिलने की उम्मीद जताई गई है। देश के सभी जिलों में गर्ल्स हॉस्टल स्थापित करने के प्रस्ताव को महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया गया है। देश के करीब 800 जिलों में से सबसे अधिक 75 जिले उत्तर प्रदेश में होने के कारण प्रदेश में 75 गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाएंगे, जिससे पिछड़े जिलों की छात्राओं को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा ‘लखपति दीदी’ योजना के विस्तार के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को “शी मार्ट्स” रिटेल स्टोर खोलने के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण देने की घोषणा की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है, जबकि नवंबर 2025 तक प्रदेश की 18.56 लाख से अधिक महिलाएं पहले ही इस श्रेणी में आ चुकी हैं। ऐसे में बजट के इन प्रावधानों से प्रदेश की महिलाओं को विशेष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
एमएसएमई सेक्टर में बढ़ेगी नकदी और भुगतान क्षमता
मध्यम एवं लघु उद्योगों को पूंजीगत सहायता देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के चैंपियन फंड की घोषणा की गई है। इसके साथ ही कोविड काल में स्थापित 50,000 करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत फंड में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये जोड़े जाएंगे, जिससे सूक्ष्म उद्यमों को भी वित्तीय सहयोग मिल सकेगा। एमएसएमई सेक्टर में भुगतान की तरलता बढ़ाने के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) को और मजबूत करने का फैसला किया गया है। अब तक इस प्रणाली के जरिए करीब 7 लाख करोड़ रुपये का भुगतान एमएसएमई को किया जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न कानूनों के अनुपालन को आसान बनाने के लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षित कॉर्पोरेट मित्रों का संवर्ग तैयार करने की पहल को भी ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

ई-कॉमर्स से वैश्विक व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
बजट में ई-कॉमर्स से जुड़े कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई है। पहले कोरियर के जरिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक के सामान के निर्यात की सीमा तय थी, जिसे अब पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इससे छोटे व्यापारी घर बैठे ही किसी भी देश से आयात और निर्यात कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपियन यूनियन से संभावित व्यापार समझौतों का सबसे अधिक लाभ अब भारत को मिल सकेगा।
इनोवेटिव कदमों से अर्थव्यवस्था को नई गति
सरकारी उद्यमों की निष्प्रयोज्य संपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) की स्थापना का प्रस्ताव भी बजट का अहम हिस्सा है। इससे सरकारी परिसंपत्तियों का पारदर्शी मूल्यांकन होगा, रियल एस्टेट बाजार में तरलता बढ़ेगी और जमीन की उपलब्धता बढ़ने से आवासीय संपत्तियों की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। वहीं बड़े शहरों के नगर निकायों को 1,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड लाने पर 100 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन की घोषणा से शहरी विकास को रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इन नवाचारी उपायों को भारतीय अर्थव्यवस्था को नए युग में ले जाने वाला कदम बताया जा रहा है।
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