आईसीएआर–आईवीआरआई, बरेली में ‘मांस प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन’ पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रारम्भ

बरेली, 12फरवरी आईसीएआर– भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली के संयुक्त निदेशालय (प्रसार शिक्षा) तथा पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत ‘मांस प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन’ विषय पर कल पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम में अनुसूचित जाति समुदाय के 25 प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में पशु उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम निदेशक डॉ. ए. आर. सेन ने स्वच्छ मांस उत्पादन, मूल्य संवर्धन, उप-उत्पादों के वैज्ञानिक उपयोग तथा आधुनिक पैकेजिंग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि देश में उत्पादित मांस का बहुत कम भाग ही प्रसंस्कृत उत्पादों में परिवर्तित होता है, जबकि इस क्षेत्र में लघु एवं सूक्ष्म स्तर पर लाभकारी उद्यम स्थापित करने की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। यदि किसान, उद्यमी एवं युवा आधुनिक तकनीकों को अपनाएँ तो यह क्षेत्र स्थायी आय और रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बन सकता है। अंत में उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेकर अधिकतम व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने का आह्वान किया।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ए. के. विश्वास ने प्रतिभागियों की सहभागिता के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रसंस्कृत मांस उत्पादों विशेषकर पोल्ट्री उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भविष्य में इसमें और वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि मांस उद्योग में केवल मांस विक्रय ही नहीं, बल्कि कटिंग-डिबोनिंग, मूल्य संवर्धित उत्पाद निर्माण, उप-उत्पाद प्रसंस्करण, ब्रांडिंग एवं विपणन जैसे कई आयाम हैं, जिनमें लघु स्तर पर उद्यम स्थापित कर अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सागर चंद ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वैज्ञानिक मांस उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा उप-उत्पादों के उपयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान स्वच्छ मांस उत्पादन, प्रसंस्करण तकनीक, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, चिलिंग, फ्रीजिंग तथा विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुमन तालुकदार द्वारा किया गया तथा अंत में डॉ. देवेंद्र कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं एवं किसानों को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने तथा आय में वृद्धि के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट


