समर्थकों से दोस्ती, संघ का विस्तार या फिर कोई संकेत; गोरखपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान का मतलब क्या

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस प्रकार के बयान से साफ कर दिया है कि संघ का विस्तार दलीय सीमाओं से पार तक होगा। वृहद हिंदू एकता की बात संघ की ओर से लगातार की जाती रही है। ऐसे में पार्टी लाइन की विचारधारा से ऊपर उठने का संदेश देकर संघ प्रमुख ने एक प्रकार से बड़ी रणनीति के संकेत दिए हैं। यूपी की राजनीति को जातीय आधार पर बांटकर विपक्षी दल सत्ता में वापसी की कोशिश करते दिख रहे हैं। इस स्थिति में संघ प्रमुख का बयान समाज को एकजुट करने के रूप में पेश किया जा रहा है।
संघ प्रमुख ने क्या कहा?
गोरखपुर के योगीराज गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में बैठक कर संगठन के विस्तार के लिए स्वयंसेवकों के साथ मीटिंग की। उन्होंने कहा कि हमें सभी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संघ से जोड़ने का निरंतर प्रयास करते रहना है। राजनीतिक पार्टी के आधार पर विभाजन करने की जगह समन्वय के साथ सबको साथ लेकर चलना है। संघ प्रमुख ने इसके लिए किसी भी पार्टी के फ्रंटलाइन नेताओं की जगह उनके समर्थकों से दोस्ती बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्थकों को संघ की खूबियां बताएं। उन्हें अपना बनाने का प्रयास करें।
संघ प्रमुख ने जातीय मुद्दों से ऊपर उठने की भी सलाह दी। स्वयं सेवकों को सवर्ण-अवर्ण के फेर में न पड़ने को कहा। मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुत्व के आधार पर और अपनेपन के व्यवहार से बिना किसी भेदभाव के सभी से जुड़ने का प्रयास करना होगा। समानता के भाव के साथ इसके लिए वास्तविक सहभोज का आयोजन करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल दूसरों के घर जाकर भोजन करने से काम नहीं चलेगा। उन्हें अपने घर में भी भोज पर बुलाना होगा।

स्थायी जुड़ाव पर दिया जोर
संघ प्रमुख की ओर से शताब्दी वर्ष में चल रहे सदस्यता अभियान पर चर्चा की। हिंदू सम्मेलन और गृह संपर्क अभियान का फीडबैक लिया। अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा कराने का आह्वान किया। मोहन भागवत ने कहा कि हमें सदस्यता की औपचारिकता से बचना होगा। लोग हमारे अभियान से स्वेच्छा से जुड़ें। इसकी कोशिश करें। उन्होंने कहा कि ऐसे ही जुड़ाव स्थायी होते हैं। लोगों को जोड़ने के बाद उन्हें संघ की शैली में ढालने पर जोर दिया।
संघ प्रमुख ने मानव जन्म के बाद बिना किसी संबंध का होता है। इसके बाद शिशु को परिवार के साथ जुड़ने में समय लगता है। इसके बाद उनमें रिश्तों की समझ विकसित होती है। परिवार-समाज में रहने का सलीका सीखते हैं। अपनेपन से बना कुटुंब केवल भारत में है। अन्य देशों में रिश्ते सौदा होता है। उन्होंने कहा कि समाज कुटुंब से चलता है।
मतांतरण से किया सचेत
आरएसएस चीफ ने धर्म परिवर्तन को एक गंभीर समस्या करार दिया। उन्होंने कहा कि हमें मतांतरण कराने वालों को दोषी ठहराने और ऐसे प्रयास रोकने की जगह सोच की दिशा बदलनी होगी। हमें मतांतरित होने वालों से सपर्क करना होगा। उनकी समस्या सुननी होगी। उसे दूर कर संगठन का हिस्सा बनाना होगा। मतांतरण का कारण उन्होंने इस पर ध्यान न दिए जाने को बताया। उन्हाने कहा कि हमने ध्यान नहीं तो मतांतरण कराने वालों को पूरा अवसर मिला।
बड़े वर्ग को साधने की कोशिश
संघ प्रमुख के बयानों ने एक बड़ा संदेश दिया है। प्रदेश में जिस प्रकार से समाज को अलग-अलग भागों में बांटकर वोट की राजनीति की जा रही है। उसकी जगह समाज को एकजुट करने का संदेश देते वे दिखे हैं। यूपी चुनाव 2027 से पहले उनकी यह रणनीति का अलग प्रभाव दिख सकता है। संघ की ओर से लगातार समाज की एकजुटता और धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों को गंभीरता से उठाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी और सीएम योगी आदित्यनाथ इन मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।


