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‘मैं नर्क में गया, राक्षसों को देखा…’ 5 दिन कोमा में रहे शख्स का चौंकाने वाला दावा, बताया मौत के करीब का डरावना अनुभव

स्वर्ग और नर्क के अस्तित्व को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग मान्यताएं हैं। कोई इसे आस्था से जोड़ता है तो कोई इसे केवल कल्पना मानता है। इसी बीच एक शख्स का दावा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस व्यक्ति का कहना है कि वह पांच दिनों तक कोमा में रहा और इस दौरान उसने नर्क जैसी भयावह जगह देखी। होश में आने के बाद उसने जो अनुभव बताया, उसने कई लोगों को हैरान कर दिया।

गेरहार्ड शुग नामक इस व्यक्ति ने दावा किया कि कोमा के दौरान उसने ऐसी जगह देखी, जहां राक्षस, भयावह माहौल और आत्माओं को सजा दिए जाने जैसे दृश्य मौजूद थे। उनका कहना है कि यह अनुभव इतना डरावना था कि उसके बाद उनके जीवन के प्रति सोच पूरी तरह बदल गई।

बेटी की मौत के बाद टूट गए थे गेरहार्ड

रिपोर्ट के अनुसार गेरहार्ड की जिंदगी में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब साल 2019 में उनकी बेटी की मौत हो गई। इस घटना के बाद वह गहरे सदमे में चले गए और खुद को बिल्कुल अकेला महसूस करने लगे।

इसी दौरान उनकी सेहत भी लगातार खराब होने लगी। उन्हें रीढ़ की हड्डी में चोट, पार्किंसंस, फेफड़ों की बीमारी, बाइपोलर डिसऑर्डर, डिप्रेशन और बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर जैसी कई गंभीर समस्याओं ने घेर लिया। इन परिस्थितियों से टूटकर उन्होंने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि मृत्यु के बाद भी जीवन होता है।

कोमा के दौरान देखा ‘नर्क’ जैसा दृश्य

गेरहार्ड के मुताबिक जब वह कोमा में थे, तब उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह नर्क में पहुंच गए हों। उन्होंने बताया कि वहां पत्थरों से बना एक विशाल महल था, जिसकी छत चीन या जापान के पुराने महलों की तरह ऊंची दिखाई दे रही थी।

उनके अनुसार उस महल में एक सिंहासन था, जिस पर शैतान बैठा हुआ था। वह एक घाट की ओर देख रहा था, जहां कई नावें बंधी हुई थीं। गेरहार्ड का दावा है कि उन नावों में आत्माओं को लाकर शैतान के सामने पेश किया जाता था और उनके साथ भी ऐसा ही हुआ।

सिंहासन पर बैठा दिखा सींग वाला शैतान

गेरहार्ड ने बताया कि महल के अंदर चार बड़े पत्थर थे, जो शेर के पंजों की तरह दिखाई देते थे। जब उन्हें घुमाया जाता था तो बहुत तेज और डरावनी आवाज आती थी।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने वहां सींग वाले शैतान को देखा। उनके अनुसार वहां का वातावरण बेहद गर्म और भयावह था। कुछ आत्माओं को एक तरह की नली में डालकर उन पत्थरों के नीचे कुचल दिया जाता था। यह दृश्य देखकर वह बुरी तरह डर गए थे।

अब जीवन के प्रति बदल गया नजरिया

गेरहार्ड का कहना है कि यह पूरा अनुभव उन्हें ऐसा लगा जैसे पांच या छह दिनों तक चलता रहा, जो उनकी कोमा की अवधि के बराबर था। बाद में जब वह कोमा से बाहर आए तो उनका जीवन के प्रति नजरिया पूरी तरह बदल गया।

अब वह कहते हैं कि वह जिंदगी को सकारात्मक तरीके से जीना चाहते हैं। उनके मुताबिक जब ईश्वर तय करेगा तभी उनका अंत होगा और तब तक वह जीवन को एक अवसर की तरह देखना चाहते हैं।

 

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