92 फीसदी जहाज किए नष्ट…10 हजार ठिकानों पर हमले, ईरान से जंग को लेकर अमेरिका का दावा

तेहरान/वॉशिंगटन: इजरायल ने ईरान के इस्फहान शहर के आसपास बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इजरायल-ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है। हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका ने दावा किया है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से उसने ईरान के लगभग 10 हजार ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईरान के 92 प्रतिशत जहाज भी नष्ट कर दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (26 मार्च 2026) सुबह इस्फहान क्षेत्र में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इस्फहान में ईरान का एक प्रमुख एयरबेस और कई अन्य सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने दावा किया कि हमले दो आवासीय इलाकों में भी हुए, हालांकि विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई। इससे पहले भी इस्फहान को निशाना बनाया जा चुका है। पिछले वर्ष जून में 12 दिन के संघर्ष के दौरान यहां के परमाणु स्थल पर भी बमबारी हुई थी।
इजरायली सेना ने इन हमलों को व्यापक बताया है और कहा है कि प्रोडक्शन एरिया तथा रक्षा से जुड़ी इकाइयों को निशाना बनाया गया। इस्फहान प्रांत की कई औद्योगिक साइट्स प्रभावित हुई हैं, जहां हथियार निर्माण से जुड़ी गतिविधियां होती हैं। हालांकि, ईरान की ओर से अब तक नुकसान का विस्तृत आकलन सामने नहीं आया है।
करीब चार सप्ताह से जारी इस संघर्ष में दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले हो रहे हैं। इजरायल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई ईरान के मिसाइल और रक्षा तंत्र को कमजोर करने पर केंद्रित बताई जा रही है। इस बीच, पिछले 24 घंटों में ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों पर हमले तेज कर दिए हैं। कुवैत में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ईंधन टैंक पर दो ड्रोन हमले हुए, जिससे आग लग गई। दमकल की टीमें आग पर काबू पाने में जुटी हैं और हवाई यातायात प्रभावित हुआ है।

कुवैत में एक घंटे के भीतर तीन बार सायरन बजाए गए। बहरीन के मुहर्रक क्षेत्र में एक सुविधा में आग लगी, जिसे बिना किसी हताहत के बुझा लिया गया। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात में भी सायरन की आवाजें सुनी गईं। सऊदी अरब ने अपने पूर्वी प्रांत में एक दर्जन से अधिक ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है।
इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि संघर्ष अब इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। हालांकि अधिकांश हमलों को नाकाम किया जा रहा है, लेकिन कुछ ड्रोन संवेदनशील ठिकानों को नुकसान पहुंचाने में सफल हो रहे हैं।
तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयासों की भी चर्चा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पाकिस्तान इस संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है और बातचीत की मेजबानी कर सकता है। हालांकि, अमेरिका ने ऐसी सभी रिपोर्टों को खारिज करते हुए इन्हें अफवाह बताया है। ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है। पाकिस्तान या तुर्किये में संभावित वार्ता को लेकर भी फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
