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वैश्विक ऊर्जा संकट के समय में रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति जी की अनुकरणीय पहल

बरेली, 11अप्रैल। विश्व समुदाय इन दिनों पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस के गंभीर संकट से जूझ रहा है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के इस कठिन समय में ऊर्जा संसाधनों की वैश्विक कमी को देखते हुए, महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने मानवता की सेवा में एक अनुकरणीय पहल की है।

प्रोफेसर सिंह ने स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है। देश अपनी आवश्यकताओं के लिए पूर्णतः सक्षम है। तथापि, विश्व समुदाय पर आए इस संकट को ध्यान में रखते हुए, प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य बनता है कि वह मानवता के धर्म का निर्वहन करते हुए अपने स्तर पर छोटा-सा प्रयास करे।

इसी सोच के तहत कुलपति जी ने स्वयं को पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों से अलग कर लिया है। अब वे कार्यालय आने-जाने के लिए बैटरी चालित ई-कार्ट का उपयोग कर रहे हैं। यह कदम न केवल ऊर्जा संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

इससे भी बढ़कर, कुलपति आवास पर भोजन पकाने के लिए प्राथमिकता ई-कुकिंग को दी गई है। बिजली की अनुपलब्धता या अत्यधिक आवश्यकता के समय पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार, गैस की जगह सबसे पहले बिजली, फिर लकड़ी को प्राथमिकता दी जा रही है। यह छोटा सा प्रयास उन्हें विश्व के उन लाखों परिवारों की पीड़ा को समझने में मदद करता है, जो इस समय ईंधन संकट से जूझ रहे हैं।

विश्वविद्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस मुहिम में सहभागिता दिखाते हुए पेट्रोल/डीजल वाहनों का प्रयोग सीमित कर दिया है। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री हरीश चंद तथा वित्त अधिकारी श्री विनोद कुमार अब अपने कार्यालय आने-जाने के लिए पैदल चलते हैं। यह नियमित व्यायाम और ऊर्जा संरक्षण दोनों के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह ने आम जनता से अपील करते हुए कहा, “हालांकि भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन मानवता का धर्म निभाने के लिए संकट की इस घड़ी में हम सभी को आगे आना चाहिए। जन सामान्य द्वारा किया गया एक छोटा-सा प्रयास भी विश्व समुदाय के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है। मेरा सभी से निवेदन है कि डीजल और पेट्रोल का न्यूनतम उपयोग करें, ई-कुकिंग को बढ़ावा दें, और ऊर्जा के वैकल्पिक साधनों को अपनाएं।”

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुलपति जी का यह कदम पूरे शैक्षणिक परिसर और आसपास के समाज के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत है। यह दर्शाता है कि जब विश्व संकट में हो, तो भारत अपनी सीमित संसाधनों के बावजूद , अपनी समृद्ध संस्कृति, मानवीय मूल्यों और वसुदेव कुटुंबकम की अपनी संस्कृति के कारण हमेशा सबसे आगे खड़ा रहता है।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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