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बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में चार दिवसीय ‘अम्बेडकर जयंती’ तथा ‘विश्वविद्यालय स्थापना दिवस समारोह’ का हुआ समापन

 


बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 11 से 14 अप्रैल तक चार दिवसीय ‘अम्बेडकर जयंती’ तथा ‘विश्वविद्यालय स्थापना दिवस’ के अवसर पर विविध शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। दिनांक 14 अप्रैल को समापन सत्र के दौरान ‘उद्यमिता से समावेशी विकास: बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की दृष्टि मेंं’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर माननीय श्रीमती बेबी रानी मौर्य, कैबिनेट मंत्री, महिला कल्याण बाल विकास एवं पोषण, उत्तर प्रदेश सरकार मौजूद रहीं। इसके अतिरिक्त मंच पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर माननीय श्रीमती विजय लक्ष्मी गौतम, राज्य मंत्री, ग्रामीण विकास, ग्रामीण अभियांत्रिकी, उत्तर प्रदेश सरकार, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल, मुख्य वक्ता एवं दलित इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के फाउंडर चैयरमेन श्री शशांक कुंवर, स्थायी आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो. के.एल. महावर एवं प्रो. राज शरण शाही मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विश्वविद्यालय कुलगीत गायन के पश्चात आयोजन समिति की ओर से मंचासीन अतिथियों एवं शिक्षकों को पौधा भेंट करके उनका स्वागत किया गया। सर्वप्रथम प्रो. राजशरण शाही ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया। मंच संचालन का कार्य डॉ. सूफिया अहमद द्वारा किया गया।
माननीय श्रीमती बेबी रानी मौर्य, कैबिनेट मंत्री, महिला कल्याण बाल विकास एवं पोषण, उत्तर प्रदेश सरकार  ने अपने संबोधन में कहा कि ज्ञान ही ज्ञान को बढ़ावा देता है और आज समाज को आवश्यकता है कि वह ज्ञान के माध्यम से परिवर्तन लाने का प्रयास करे। उन्होंने इस बात पर चिंतन करने का आह्वान किया कि हम किस प्रकार बाबासाहेब के सपनों को साकार कर रहे हैं। उन्होंने बाबासाहेब के कार्यों के साथ-साथ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी और दीनदयाल उपाध्याय जी के योगदानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने दलितों, वंचितों और महिलाओं के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष किया और संविधान के माध्यम से महिलाओं को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया, क्योंकि महिलाएं समाज के प्रत्येक स्तर पर समझदारी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि विचार ही नवाचार को जन्म देते हैं, इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब तक हर वर्ग सशक्त नहीं होगा, तब तक वास्तविक सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं है। अंत में उन्होंने बाबासाहेब के संदेश को दोहराते हुए कहा कि हमें “शिक्षित बनो, संगठित बनो और संघर्ष करो” के सिद्धांत को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में निरंतर प्रयास करना चाहिए।
माननीय श्रीमती विजय लक्ष्मी गौतम, राज्य मंत्री, ग्रामीण विकास, ग्रामीण अभियांत्रिकी, उत्तर प्रदेश सरकार, ने अपने उद्बोधन में कहा कि बाबासाहेब के जीवन से हमें यह सीखने की आवश्यकता है कि कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए भी अपने लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि इसके जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बाबासाहेब ने संविधान सभा में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूत नींव रखी, जातिगत भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया तथा महिलाओं, युवाओं और श्रमिकों के अधिकारों के प्रबल समर्थक रहे। माननीय मंत्री जी ने कहा कि आज भी समाज में विभिन्न रूपों में असमानता और भेदभाव मौजूद है, इसलिए हम सभी का कर्तव्य है कि हाशिये पर रहने वाले लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने लोगों को एकजुट करने पर बल देते हुए कहा कि जब तक असमानता की खाई समाप्त नहीं होगी, तब तक समाज का समग्र उत्थान संभव नहीं है। इसके लिए हमारी सोच को व्यापक बनाने की आवश्यकता है, क्योंकि विचारों में परिवर्तन से ही बड़ी व्यवस्थाओं में बदलाव आता है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से आह्वान किया कि वे सामाजिक बंधनों से बाहर निकलकर शिक्षा को अपना सशक्त माध्यम बनाएं और समाज की दिशा एवं दशा बदलने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने बाबासाहेब की जयंती के अवसर पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें बाबासाहेब के जीवन से मार्गदर्शन लेने और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बाबासाहेब के प्रसिद्ध विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो जितना पिएगा, वह उतना ही दहाड़ेगा’, क्योंकि शिक्षा ही सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। साथ ही उन्होंने ‘सा विद्या या विमुक्तये’ के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए शिक्षा को मुक्ति और प्रगति का आधार बताया।
उन्होंने आगे कहा कि उद्यमिता के माध्यम से समाज में व्यापक प्रगति लाई जा सकती है। प्रो. मित्तल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के समय में केवल नौकरी खोजने के बजाय उन्हें नौकरी देने वाला बनना होगा। जब युवा वर्ग आत्मनिर्भर बनकर रोजगार सृजन करेगा, तभी भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप सशक्त और विकसित बन सकेगा तथा समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव हो पायेगा।
मुख्य वक्ता एवं दलित इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के फाउंडर चैयरमेन श्री शशांक कुंवर ने दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCI) के कार्यों एवं उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह संस्था समाज के वंचित एवं हाशिए पर रहने वाले वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि DICCI का प्रमुख उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना, अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के युवाओं को व्यवसाय के प्रति प्रेरित करना तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। यह संगठन विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता से जुड़ी जानकारी और नेटवर्किंग के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाता है, जिससे वे अपने स्वयं के उद्यम स्थापित कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि DICCI न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी युवा उद्यमियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान बना सकें और देश की आर्थिक प्रगति में सक्रिय योगदान दे सकें।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय में ‘भीम वॉक’ का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के साथ मिलकर पूरे परिसर में पदयात्रा की। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने एकजुट होकर डॉ. बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के विचारों एवं संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया और उनके आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। साथ ही विश्वविद्यालय कुलपति एवं अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल चार्जिंग प्वाइंट एवं ‘नवकल्पना’ के नाम से बनी सेक्शन 8 कंपनी का उद्घाटन किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय में आयोजित वाद-विवाद, निबंध, पोस्टर मेकिंग, स्लोगन राइटिंग, क्विज , आशु भाषण, नुक्कड़ नाटक एवं रंगोली प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति की ओर से मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। अंत में प्रो. के. एल. महावर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम समिति की अध्यक्षा डॉ. मोनिका शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर बीबीएयू के विद्यार्थियों एवं संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें नृत्य, गीत आदि की आकर्षक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत एवं प्रेरणादायी बना दिया। साथ ही एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण उद्योग, हस्तशिल्प, पारंपरिक कला एवं विविध लोक उत्पादों से संबंधित वस्तुओं का अत्यंत सजीव, आकर्षक एवं सराहनीय प्रदर्शन प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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