सड़क के बाद अदालत में भी पीछे हटे CJP नेता, हाई कोर्ट की फटकार के बाद सौरभ दास-अशुतोष रांका ने वापस ली याचिका
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच दोनों नेताओं को दिल्ली हाई कोर्ट में भी राहत नहीं मिली। न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सीधे हाई कोर्ट आने पर सवाल उठाए और पहले निचली अदालत की कार्यवाही का इंतजार करने की सलाह दी। अदालत की टिप्पणियों के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। इससे पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की थी।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्यों पीछे हटे CJP नेता?

सौरभ दास और आशुतोष रांका ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने पूछा कि जब उनके मामले की सुनवाई बुधवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में निर्धारित है, तो उन्होंने पहले वहां की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार क्यों नहीं किया।
अदालत ने दोनों नेताओं के वकील से कहा कि पहले निचली अदालत की सुनवाई का परिणाम देखा जाए। यदि वहां से राहत नहीं मिलती है और शिकायत बनी रहती है, तो वे नियमानुसार अपीलीय या पुनरीक्षण अदालत का रुख कर सकते हैं। सुनवाई के बाद CJP नेताओं ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया।
निचली अदालत के आदेश को दी थी चुनौती
दोनों नेताओं ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के 19 अक्टूबर के उस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई थी। उन्होंने दशहरा की छुट्टियों के दौरान बंद हाई कोर्ट में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसके बाद मामले पर सुनवाई हुई।
पीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अदालत ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करना उचित कानूनी उपाय नहीं था। अदालत की सलाह के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली।
जंतर-मंतर जाने और बैरिकेड तोड़ने पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सौरभ दास और आशुतोष रांका के जंतर-मंतर जाने पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि दोनों ने बेल बॉन्ड दिया था, इसके बावजूद वे उस स्थान पर पहुंचे, जहां से संबंधित अधिसूचना के तहत प्रदर्शन की अनुमति वापस ली जा चुकी थी।
पीठ ने कहा कि जंतर-मंतर से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन संबंधित अधिसूचना पर रोक नहीं लगी है। ऐसे में वहां जाकर बैरिकेड तोड़ने जैसी गतिविधियों से कानून-व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। अदालत ने यह आशंका भी जताई कि इस तरह की कार्रवाई के दौरान दूसरे लोग शामिल हो सकते हैं, जिन पर आयोजकों का नियंत्रण न हो।
विदेशों में हिंसा और आगजनी का भी किया जिक्र

सुनवाई के दौरान अदालत ने विदेशों में हुए प्रदर्शनों और उनके हिंसक रूप लेने की घटनाओं का उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि कई बार शांतिपूर्ण आंदोलन के रूप में शुरू हुई गतिविधियां बाद में आगजनी और लूटपाट में बदल जाती हैं। अदालत के मुताबिक, प्रदर्शन आयोजित करने वालों के लिए यह जरूरी है कि वे संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखें और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखें।
अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस से अनुमति लेने का उद्देश्य केवल प्रदर्शन पर रोक लगाना नहीं है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना और अवांछित तत्वों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकना भी है।
13 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए थे सौरभ और आशुतोष
सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को उस समय हिरासत में लिया गया था, जब उन्होंने कथित तौर पर जंतर-मंतर में प्रवेश करने के लिए बंद फाटक को पार किया था। इसके बाद दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में उनकी हिरासत बढ़ाए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
इस मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले निचली अदालत की प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी। इसके बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली।
अभिजीत दीपके ने भी आंदोलन फिलहाल स्थगित करने का किया था ऐलान
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 20 अक्टूबर को जारी वीडियो संदेश में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शन को फिलहाल स्थगित करने की बात कही थी। उन्होंने पार्टी से जुड़े लोगों से दशहरा और दिवाली के दौरान अपने परिवार के साथ समय बिताने की अपील की थी।
इस घटनाक्रम के बाद पार्टी के आंदोलन और उसके नेताओं की कानूनी लड़ाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जहां दीपके ने आंदोलन को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की, वहीं सौरभ दास और आशुतोष रांका को हाई कोर्ट में दायर याचिका वापस लेनी पड़ी।
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