बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में ‘डिजिटल शिक्षा और स्वयं (SWAYAM)’ विषय पर हुआ एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 23 दिसंबर को ‘डिजिटल शिक्षा और स्वयं (Digital Education and SWAYAM) विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मीडिया सेंटर, बीबीएयू एवं स्वयं सेल के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन माध्यम में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल द्वारा की गयी। मुख्य अतिथि एवं वक्ता के तौर पर एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर, कोलकाता के निदेशक डॉ. रक्षक जैन उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मुख्य तौर पर एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर (मीडिया सेंटर), बीबीएयू लखनऊ के निदेशक एवं कार्यक्रम चैयरपर्सन प्रो. गोपाल सिंह, कार्यक्रम समन्वयक एवं स्वयं सेल,बीबीएयू की को-ऑर्डिनेटर प्रो. यूवी किरण एवं ईएमएमआरसी (मीडिया सेंटर), बीबीएयू लखनऊ के सहायक निदेशक डॉ. महेंद्र कुमार पाढी उपस्थित रहे। सर्वप्रथम डॉ. महेंद्र कुमार पाढी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं प्रो. यूवी किरण ने सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने आयोजन समिति को इस प्रकार के कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में आधुनिकीकरण की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर है, जिसमें सूचना, संचार एवं प्रौद्योगिकी (ICT) की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसीलिए शिक्षा प्रणाली में ICT को समाहित करके सकारात्मक और गुणात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। प्रो. मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि आज पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों को ब्लेंडेड टीचिंग मेथड के साथ जोड़ना होगा, जिसके लिए स्वयं को निरंतर अपडेट करना आवश्यक है और यह केवल डिजिटल शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से ही संभव है। अतः डिजिटल शिक्षा को इस प्रकार विकसित किया जाना चाहिए कि वह सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण हो तथा उसमें उच्च स्तर की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय समानता, सौहार्द और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है, जिसके लिए शिक्षण माध्यमों का निरंतर अपग्रेड होना आवश्यक है, क्योंकि कोई भी संस्थान यदि समय के साथ कदम नहीं मिलाता है तो प्रगति संभव नहीं होती। इसी दृष्टि से विश्वविद्यालय में कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि विकसित भारत–2047 के संकल्प को साकार करने में विश्वविद्यालय एवं उसके विद्यार्थी प्रभावी और सार्थक योगदान दे सकें।
मुख्य अतिथि एवं एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर, कोलकाता के निदेशक डॉ. रक्षक जैन ने अपने संबोधन में ई-लर्निंग, ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज (OER) तथा MOOCs के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में ये सभी प्लेटफॉर्म अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक शिक्षण प्रणाली और ई-लर्निंग के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए उनसे संबंधित विभिन्न सिद्धांतों और अवधारणाओं पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. जैन ने बताया कि बदलते शैक्षिक परिदृश्य में डिजिटल माध्यम न केवल शिक्षण को अधिक लचीला बनाते हैं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाते हैं।
इसके अतिरिक्त डॉ. जैन ने कंटेंट मटेरियल डेवलपमेंट एवं डिलीवरी के अंतर्गत MOOCs कार्यक्रम की संरचना, उसकी कार्यप्रणाली और चरणबद्ध प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को कंटेंट क्रिएशन के रचनात्मक तरीकों, प्रभावी प्रस्तुति तथा उससे संबंधित उपयोगी पहलुओं से अवगत कराया तथा यह भी बताया कि किस प्रकार चैटजीपीटी, मैटा जैसे आधुनिक डिजिटल टूल्स का सकारात्मक और सार्थक उपयोग किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने ओपन ऑनलाइन कोर्सेज, ओपन कोर्सवेयर, ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज, मल्टीमीडिया आधारित इंटरएक्टिव ट्यूटोरियल्स, वर्चुअल रियलिटी आधारित लर्निंग सिस्टम, वेब आधारित लेक्चर्स और ई-कंटेंट के महत्व पर प्रकाश डाला तथा उपलब्ध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे SWAYAM ऑनलाइन कोर्स, UG/PG MOOCs, ई-पीजी पाठशाला, SWAYAM प्रभा और DTH प्लेटफॉर्म के उपयोग और उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य सभी को डिजिटल शिक्षण की नवीन अवधारणाओं से अवगत कराना रहा। संगोष्ठी के माध्यम से प्रतिभागियों को MOOCs के निर्माण की प्रक्रिया को अवधारणा निर्माण से लेकर चरणबद्ध विकास तक समझाया गया। इसके अतिरिक्त SWAYAM प्लेटफॉर्म पर गुणवत्तापूर्ण पाठ्यक्रम विकसित करने हेतु शिक्षकों की क्षमता को सुदृढ़ तथा MOOCs पाठ्यक्रम प्रस्ताव (Course Proposal) तैयार करने में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। अंत में प्रो. गोपाल सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शिक्षक, शोधार्थी , प्रतिभागी एवं विद्यार्थी जुड़े।
---------------------------------------------------------------------------------------------------


