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विश्व AMR सप्ताह के दौरान AIIMS रायबरेली में डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक के दुरूपयोग के खतरे को उजागर किया

रायबरेली, 24 नवम्बर 2025 – विश्व प्रतिजैविक प्रतिरोध (AMR) जागरूकता सप्ताह 2025 के अवसर पर AIIMS रायबरेली में मेडिकल कॉलेज परिसर में “Building the Foundation of Antimicrobial Stewardship: From Awareness to Action” विषय पर सतत चिकित्सीय शिक्षण (CME) आयोजित की गई।
एम्स की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) अमिता जैन इस आयोजन की मुख्य संरक्षक रहीं, तथा प्रो. (डॉ.) नीरज कुमारी और प्रो. (डॉ.) अर्चना वर्मा सह–संरक्षक रहीं।
प्रो. (डॉ.) प्रगति गर्ग ने आयोजन अध्यक्ष तथा डॉ. शेफाली गुप्ता ने आयोजन सचिव का दायित्व निभाया।

कार्यक्रम में डॉ. स्वेता सिंह, डॉ. सना इस्लाही, डॉ. कलीचरण दास और डॉ. प्रमोद कुमार सहित विशेषज्ञों ने बढ़ते एंटीबायोटिक प्रतिरोध, सही नमूना संग्रह, ICU में चुनौतियाँ और MDR/XDR जैसे “सुपरबग” पर विस्तृत चर्चा की।

संस्थान के 2025 एंटिबायोग्राम के आधार पर अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कुछ सामान्य प्रतिजैविक दवाओं का असर अब कम हो रहा है, इसलिए उनका सावधानी से उपयोग होना अत्यंत आवश्यक है।

जनता के लिए मुख्य संदेश:

• बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें।
• पुरानी बची हुई दवाएँ दोबारा न लें, न ही किसी अन्य को दें।
• लिखी गई पूरी दवा और पूरा कोर्स अवश्य पूरा करें।
• साधारण सर्दी-खांसी या वायरल बुखार में एंटीबायोटिक की ज़िद न करें।
• हाथों की सफाई और टीकाकरण से संक्रमण से बचाव संभव है।

AIIMS रायबरेली ने विश्व AMR सप्ताह की थीम “अभी कार्यवाही करें: वर्तमान की रक्षा करें, भविष्य को संरक्षित करें / Act Now: Protect Our Present, Secure Our Future” को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प को दोहराया।

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