Top Newsउत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

लखनऊ में ‘द्रव्य निदानम-2026’ की गूंज, आयुर्वेदिक पैथोफिज़ियोलॉजी और एथनोबोटेनिकल थेरेप्यूटिक्स पर पहली राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

लखनऊ: Goyal Ayurvedic Medical College and Hospital में 27 फरवरी 2026 को “आयुर्वेदिक पैथोफिज़ियोलॉजी और एथनोबोटेनिकल थेरेप्यूटिक्स के एक एकीकृत दृष्टिकोण” विषय पर प्रथम राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कॉलेज के द्रव्यगुण और रोग निदान एवं विकृति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर से आए विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में 450 से अधिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ शुभारंभ

संगोष्ठी का शुभारंभ वंदे मातरम, धन्वंतरि वंदना, गणेश पूजन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद प्राचार्य प्रो. अविनाश चन्द्र श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथियों का स्वागत करते हुए ‘द्रव्य निदानम-2026’ की अवधारणा और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर गोयल ग्रुप के चेयरमैन ई. महेश गोयल और सीईओ ई. समर्थ गोयल सहित डॉ. विवेक अग्रवाल (एआईआईए, नई दिल्ली), डॉ. रंधीर सिंह (डीन, श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र), डॉ. राकेश कुमार तिवारी (प्रिंसिपल एवं डीन, रुहेलखंड आयुर्वेदिक कॉलेज, बरेली), डॉ. मोहन लाल जयसवाल (पूर्व प्रिंसिपल, एनआईए, जयपुर), डॉ. आर.बी. यादव (एचओडी, द्रव्यगुण विभाग) और डॉ. पी.सी. चौधरी (एचओडी, रोग निदान विभाग) का स्वागत किया गया।

एथनोबोटेनिकल दावों से लेकर रिवर्स फार्माकोलॉजी तक हुई चर्चा

मुख्य अतिथि डॉ. मोहन लाल जयसवाल ने आयुर्वेद के अल्प ज्ञात औषध द्रव्यों और जनजातीय परंपराओं में प्रचलित औषधियों के एथनोबोटेनिकल दावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रिवर्स फार्माकोलॉजी, जलवायु परिवर्तन और औषधीय पौधों की प्रभावशीलता पर इसके असर पर भी चर्चा की। डॉ. राकेश कुमार तिवारी ने विष विज्ञान और रोग चिकित्सा के संबंध के साथ बायो-इन्फॉर्मेटिक्स की भूमिका तथा दवा अनुसंधान में इसके उपयोग को रेखांकित किया। डॉ. रंधीर सिंह ने आयुर्वेद और रोग निदान में डिजिटल हेल्थ नॉलेज की संभावनाओं पर विचार साझा किए, जबकि डॉ. विवेक अग्रवाल ने आयुर्वेदिक रोग निदान में इंस्ट्रुमेंटेशन और बायोसेंसर की आवश्यकता पर जोर दिया।

एआई और आयुर्वेद निदान पर विशेषज्ञों के विचार

संगोष्ठी में प्रो. सुनील गुप्ता, एचओडी रोग निदान विभाग ने स्रोतस के महत्व और आयुर्वेदिक निदान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं प्रो. ए.के. श्रीवास्तव, एचओडी द्रव्यगुण विभाग ने जलवायु परिवर्तन के औषधियों पर प्रभाव और आयुर्वेद के अल्प ज्ञात औषधीय द्रव्यों के वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई।

‘द्रव्य’ और ‘निदान’ के संतुलन पर जोर

आयोजन सचिव डॉ. अंकुर सक्सेना ने कहा कि आयुर्वेद में ‘द्रव्य’ (औषधि) और ‘निदान’ (रोग की पहचान) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बिना सटीक निदान के औषधि प्रभावी नहीं हो सकती और बिना शुद्ध औषधि के निदान का कोई लाभ नहीं। उन्होंने बताया कि ‘द्रव्य निदानम-2026’ का उद्देश्य चिकित्सकों और शोधार्थियों को इन दोनों विषयों के सूक्ष्म सामंजस्य से अवगत कराना है।

आयोजन सचिव डॉ. दीपक सुधी ने कहा कि इस संगोष्ठी का केंद्र बिंदु “सटीक निदान और गुणवत्तापूर्ण औषधि” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक रोग की जड़ को आधुनिक मापदंडों पर नहीं समझा जाएगा और औषधियों की शुद्धता सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की स्वीकार्यता को और मजबूत नहीं किया जा सकता।

SEO Keywords: Goyal Ayurvedic Medical College Lucknow, Dravya Nidanam 2026, Ayurvedic Pathophysiology Seminar, Ethnobotanical Therapeutics India, Ayurveda National Seminar 2026, Reverse Pharmacology Ayurveda, Digital Health in Ayurveda, Bioinformatics in Drug Research, Lucknow Ayurveda News, आयुर्वेद संगोष्ठी लखनऊ, द्रव्य निदानम 2026, एथनोबोटेनिकल थेरेप्यूटिक्स, आयुर्वेदिक पैथोफिज़ियोलॉजी, डिजिटल हेल्थ आयुर्वेद, रिवर्स फार्माकोलॉजी भारत

---------------------------------------------------------------------------------------------------