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एम जे पी रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के कृषि एवं प्रौद्योगिकी संकाय में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना अंतर्गत कृषक संगोष्ठी का आयोजन

बरेली, 03 फरवरी।एम जे पी रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के कृषि एवं प्रौद्योगिकी संकाय के सभागार में विगत दिवस उद्यान विभाग जनपद बरेली के सहयोग से जनपद स्तरीय कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत किया गया । इस अवसर पर बरेली और आस पास के किसान भारी संख्या में शामिल हुए। इस संगोष्ठी में बरेली के प्रगतिशील किसान, कृषक उत्पादक संघ और स्वयं सहायता समूह द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों के स्टाल भी प्रदर्शन और बिक्री के लिए लगाए गए । इनमें प्रमुख रूप से शहद, मसाले, आचार, मुरब्बा, सरसों का तेल , जैविक रसायन, सब्जियों की पौध इत्यादि के स्टाल थे। अधिकतर उत्पाद जैविक रूप से तैयार किए गए थे जिन्हें किसानों ने खूब पसंद किया और क्रय भी किया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर के पी सिंह, उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा 9 जिलों के लगभग 5 लाख विद्यार्थियों को शिक्षित किया जा रहा हैआपने कहा कि कृषि शिक्षा और किसानों की प्रगति बहुत आवश्यक है, विश्वविद्यालय में कृषि संकाय के खुलने से अब आस पास के किसान सीधे लाभान्वित होंगे। वैसे तो देश के अनेक विश्वश्विद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु प्रयासरत हैं लेकिन बदलती तकनीक के साथ अब ऐसे डिजिटल प्लेटफार्म की आवश्यकता है जिसे किसान आसानी से अपनी भाषा में समझ सके। उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालयों में फल व सब्जियों की अच्छी नर्सरी तथा खेती के इंटीग्रेटेड मॉडल बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष बल देते हुए कहा कि कृषि संकाय के छात्र, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान मिलकर आम किसानों से जुड़ने और उनके लिए काम करने की आवश्यकता है तभी देश के किसान हमारे अन्नदाता का विकास हो पाएगा। अंत में उन्होंने कहा , यदि आप किसान की मदद करोगे, तो भगवान भी आपकी मदद करेगा।
इस अवसर पर सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर रहमान खैरा लखनक के पूर्व निदेशक डॉ शैलेंद्र राजन ने अपने अनुभवों को साझा किया उन्होंने विशेष रूप से आम और अमरूद की फसल के बारे में विस्तार से चर्चा की, उन्होंने कहा कि बाग लगाने से पहले प्रजातियों की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें, आपने कृषि क्षेत्र में विविधीकरण अपनाए जाने पर विशेष बल दिया ।
कार्यक्रम में कृषि एवं प्रौद्योगिकी संकाय के विभागाध्यक्ष और डीन डॉ उपेंद्र कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय में कृषि संकाय के प्रथम वर्ष के छात्रों को योग्य शिक्षकों द्वारा कृषि की तकनीकि जानकारी दी जा रही है, उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को कृषि विषय की शिक्षा अवश्य दिलाएं ताकि वे कृषि की बारीकियां सीख कर किसानों की समृद्धि और अपने भविष्य का निर्माण कर सके।
कृषि विज्ञान केंद्र के विषय विशेषज्ञ डॉ रंजीत सिंह ने बाग लगाने की तकनीक के संबंध में कहा कि फलदार पेड़ लगाने से कुछ दिन पूर्व गड्ढों की खुदाई अवश्य कर लें और बाग के साथ साथ विविधीकरण के रूप में मुर्गी पालन अथवा बकरी पालन का कार्य भी करें क्योंकि फलों से नियमित आय नहीं मिलती है और किसानों की जीविका के लिए नियमित आय की जरूरत होती है ।
अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए जिला उद्यान अधिकारी बरेली श्री जितेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत अनुदान राशि के रूप में दी जा रही सहायता का लाभ किसान भाई अवश्य उठाएं। इस योजना के अंतर्गत 35-50% तक अनुदान दिया जाता है उन्होंने कहा कि पॉली हाउस निर्माण के लिए 50% अनुदान की व्यवस्था है। कृषि उपकरणों पर आधारित उद्योग लगाने के लिए भी 35% अनुदान दिया जाता है। कार्यक्रम का संचालन कृषि संकाय के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस श्री अनिल साहनी ने किया।
इस अवसर पर सी आई एस एच के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ डी के शर्मा, उपनिदेशक उद्यान बरेली मंडल, वी एन आर नर्सरी छत्तीसगढ़ के सौरभ प्रधान, डॉ मुहम्मद गुफरान खान, डॉ मोहित चौधरी, डॉ, संजीव कुमार, मीडिया प्रभारी डॉ विनय वर्मा और तपन वर्मा उपस्थित रहे।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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