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आईवीआरआई के निदेशक डा. त्रिवेणी दत्त बने सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति

बरेली, 14 जनवरी। भारतीय पशुचिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज़तनगर के निदेशक एवं कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त को सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसवीपीयूएटी), मेरठ के कुलपति का कार्यभार मिला है। अपने 34 वर्षों से अधिक के शैक्षणिक, अनुसंधान, प्रसार एवं प्रशासनिक अनुभव के साथ डॉ. त्रिवेणी दत्त को एक दूरदर्शी, परिणामोन्मुख और किसान-केंद्रित नेतृत्वकर्ता के रूप में जाना जाता है।
डॉ. त्रिवेणी दत्त ने स्नातक की उपाधि कृषि विज्ञान से उत्तीर्ण करने के पश्चात आईवीआरआई, इज़तनगर से पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन में परास्नातक तथा पशु प्रजनन में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वे 23 वर्षों से अधिक समय तक प्रोफेसर/प्रधान वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत रहे और 27 वर्षों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव रखते हैं। उन्होंने संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक), अधिष्ठाता तथा संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए संस्थागत शासन, शैक्षणिक सुधार और प्रसार सेवाओं को नई दिशा दी।
उनके नेतृत्व में आईसीएआर–आईवीआरआई को NAAC A++ मान्यता प्राप्त हुई, जो संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध उत्कृष्टता का प्रमाण है। डॉ. दत्त ने 8 पशु नस्लों/प्रजातियों का विकास, 18 उत्पादों (6 टीके एवं 12 पशुचिकित्सा उपकरण) का विकास, 2 पेटेंट, 9 पंजीकृत डिज़ाइन और 41 कॉपीराइट दर्ज किए । इसके अतिरिक्त, उनके द्वारा विकसित 03 प्रौद्योगिकियों का व्यवसायीकरण कर 07 औद्योगिक इकाइयों को किया गया, जिससे लगभग ₹4.42 करोड़ का राजस्व अर्जित हुआ
डॉ. त्रिवेणी दत्त ने शिक्षा और विस्तार को तकनीक से जोड़ते हुए 142 आईसीटी आधारित शिक्षण टूल्स (45 मोबाइल ऐप्स और 3 चैटबॉट) विकसित किये। पशु प्रबंधन हेतु 10 वैज्ञानिक पैकेज ऑफ प्रैक्टिस तैयार किए, जिससे किसानों और पशुपालकों तक शोध आधारित समाधान सीधे पहुँचे। उन्होंने 333 शोध लेख, 29 पुस्तकें और 15 प्रशिक्षण पुस्तिकाएँ प्रकाशित कर ज्ञान-सृजन में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उनकी पहल पर 2 स्नातक, 11 स्नातकोत्तर डिग्री, 22 स्नातकोत्तर डिप्लोमा, 138 प्रमाणपत्र/व्यावसायिक तथा 17 दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम आरंभ किए गए। यह प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप बहुविषयक, कौशल-आधारित और लचीली शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुए।
डॉ. दत्त के नेतृत्व में 40 से अधिक नवाचार स्टार्टअप, 238 से अधिक उद्यमियों का सृजन हुआ और 6,400 से अधिक राष्ट्रीय विस्तार कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने 12 देशों की 47 प्रयोगशालाओं में 50 विद्यार्थियों और 22 संकाय सदस्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की, जिससे संस्थान की वैश्विक दृश्यता बढ़ी। अनुसंधान एवं शिक्षण के लिए ₹156 करोड़ की आधारभूत संरचना का विकास तथा ₹3 करोड़ से अधिक की सीएसआर निधि जुटाना भी उनकी प्रशासनिक दक्षता को दर्शाता है।
डॉ. त्रिवेणी दत्त को एसवीपीयूएटी, मेरठ का कुलपति नियुक्त किया गया है, तो विश्वविद्यालय को एक क्षेत्रीय रूप से सुदृढ़, राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित और डिजिटल रूप से सक्षम कृषि विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की उनकी स्पष्ट दृष्टि सामने आती है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय कृषि शिक्षा मान्यता बोर्ड द्वारा प्रदत्त B++ श्रेणी से A++, NAAC की A श्रेणी से A++ तथा NIRF में शीर्ष 10 में स्थान दिलाना उनकी प्रमुख प्राथमिकता है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के समग्र विकास हेतु उनका लक्ष्य शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार का प्रभावी एकीकरण; किसान-केंद्रित एवं समस्या-उन्मुख अनुसंधान; उद्योग, आईसीएआर संस्थानों तथा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ सशक्त साझेदारी; डिजिटल विस्तार के माध्यम से किसानों को वास्तविक समय पर परामर्श उपलब्ध कराना; नवाचार, स्टार्ट-अप एवं कृषि-व्यवसाय को प्रोत्साहित करना तथा एफपीओ की संख्या में वृद्धि करना होगा। इसके साथ ही इनफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए देश तथा विदेश के संस्थानों से फंड जुटाने के प्रयास किए जाएंगे । इसके साथ ही महिला शक्तिकरण को बड़ावा दिया जाएगा ।
वे एसवीपीयूएटी को NIRF, QS एशिया और QS वर्ल्ड रैंकिंग में स्थान दिलाने के लिए डेटा-आधारित शासन, संकाय सशक्तिकरण, उच्च-प्रभाव शोध, छात्र रोजगार-योग्यता और वैश्विक सहयोग पर विशेष बल देने की योजना रखते हैं।
डॉ. त्रिवेणी दत्त का नेतृत्व दर्शन परामर्शात्मक, पारदर्शी और नियम-आधारित शासन पर आधारित है। वे संस्थागत स्वायत्तता के साथ जवाबदेही, सौहार्दपूर्ण कार्य-संस्कृति, लैंगिक समानता और भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन में विश्वास रखते हैं। उनकी दीर्घकालिक दृष्टि एक ऐसे एसवीपीयूएटी के निर्माण की है, जो अनुसंधान की प्रासंगिकता, किसान-केंद्रित प्रभाव, प्रेरित संकाय, आत्मविश्वासी छात्र और सशक्त कर्मचारियों के लिए जाना जाए तथा विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों में निर्णायक योगदान दे।
डॉ. त्रिवेणी दत्त जैसे अनुभवी प्रशासक के नेतृत्व में एसवीपीयूएटी, मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए नीति-सहयोगी (policy-supporting) थिंक टैंक के रूप में भी उभर सकता है। गन्ना, गेहूँ, धान, दुग्ध एवं पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था वाले इस क्षेत्र में विश्वविद्यालय की भूमिका केवल शैक्षणिक संस्थान तक सीमित न रहकर कृषक आय वृद्धि, जलवायु-सहनशील कृषि और कृषि-व्यवसाय विस्तार के लिए रणनीतिक समाधान उपलब्ध कराने वाली संस्था बन सकती है।
डॉ. दत्त का आईसीएआर, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा विभिन्न राष्ट्रीय समितियों के साथ कार्य करने का व्यापक अनुभव, विश्वविद्यालय को राज्य एवं केंद्र सरकार की योजनाओं से बेहतर ढंग से जोड़ने में सहायक होगा। इससे न केवल अनुसंधान परियोजनाओं और वित्तपोषण में वृद्धि होगी, बल्कि विश्वविद्यालय की सिफारिशें सीधे नीति निर्माण में भी परिलक्षित हो सकेंगी।
उनके नेतृत्व में छात्र-केंद्रित प्रशासन, समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया और परिणाम-आधारित मूल्यांकन संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। इससे एसवीपीयूएटी का अकादमिक वातावरण अधिक अनुशासित, प्रतिस्पर्धी और प्रेरणादायक बनेगा।
समग्र रूप से देखा जाए तो डॉ. त्रिवेणी दत्त की नियुक्ति को केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एसवीपीयूएटी, मेरठ के संस्थागत पुनरोत्थान और भविष्य की दिशा तय करने वाला अवसर माना जा रहा है—जो विश्वविद्यालय को क्षेत्रीय आवश्यकता से वैश्विक प्रासंगिकता की ओर ले जा सकता है। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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