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Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति यानी खिचड़ी 14 जनवरी को, जानिए पुण्यकाल, महत्व और शुभ रंग

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नई दिल्ली। जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जिसके साथ दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है, जबकि पंजाब और जम्मू-कश्मीर में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन दही-चूड़ा और खिचड़ी खाने की परंपरा है।

मकर संक्रांति 2026 की तिथि और पुण्यकाल
इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026, बुधवार को मनाई जाएगी। सूर्य देव इस दिन दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर पुण्यकाल 03:13 PM से 05:45 PM तक रहेगा, जबकि महापुण्यकाल 03:13 PM से 04:58 PM तक रहेगा।

शुभ रंग और वाहन
इस बार मकर संक्रांति का नाम मन्दाकिनी रखा गया है। शुभ रंग पीला है। वाहन व्याघ्र और उपवाहन अश्व निर्धारित किए गए हैं।

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश को मकर संक्रांति कहा जाता है। यह दिन खरमास के अंत और शुभ कार्यों की नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन दान और स्नान का विशेष महत्व है। विशेषकर तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और कंबल का दान अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति से सूर्य देव उत्तर दिशा की ओर गतिमान होते हैं, जिससे यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है।

पौराणिक कथा और महत्व
एक प्राचीन कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने इस दिन असुरों का संहार किया था और उनके सिरों को मंदरा पर्वत पर गाड़ा। तब से इस दिन मकर संक्रांति पर्व के रूप में मनाया जाने लगा। गंगा, काशी और प्रयाग जैसे पवित्र स्थलों में स्नान करना भी इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

 

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