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बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में संविधान दिवस के अवसर पर विधि विभाग की ओर से ‘भारतीय संविधान के 75 वर्ष: सामाजिक-आर्थिक न्याय के माध्यम से विकसित भारत का मार्ग-मानचित्र’ विषय पर आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन 

             बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ के अवसर पर विधि विभाग की‌ ओर से ‘भारतीय संविधान के 75 वर्ष: सामाजिक-आर्थिक न्याय के माध्यम से विकसित भारत का मार्ग-मानचित्र’ विषय पर आयोजित द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। मुख्य अतिथि के तौर पर श्री धर्मवीर प्रजापति, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), होम गार्ड एवं नागरिक सुरक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर बीबीएयू कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल, डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एस.के. भटनागर, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी के फैकल्टी ऑफ कामर्स एंड मैनेजमेंट की संकायाध्यक्ष प्रो. सुनीता भरतवाल, विधि अध्ययन विद्यापीठ, बीबीएयू के संकायाध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार चढ्ढा एवं विधि विभाग की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. सुदर्शन वर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विश्वविद्यालय कुलगीत गायन के पश्चात आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट करके उनका स्वागत किया गया। सर्वप्रथम प्रो. संजीव कुमार चढ्ढा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का‌ स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।
          श्री धर्मवीर प्रजापति, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), होम गार्ड एवं नागरिक सुरक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि आज भी समाज में विभिन्न स्तरों पर असमानताएँ देखने को मिलती हैं, लेकिन मात्र संविधान के द्वारा उन असमानताओं को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बाबासाहेब ने कठिन परिस्थितियों को समझते हुए, उनके अनुरूप कार्य किया और समाज को एक न्यायपूर्ण दिशा प्रदान की, उसी प्रकार हमें भी उनके आदर्शों को अपनाकर सामाजिक जीवन में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। आज भले ही बाबासाहेब हमारे बीच नहीं हैं, परंतु उनका त्याग, समर्पण और बलिदान की गाथाएँ आज भी जीवंत हैं और हमें निरंतर प्रेरित करती हैं। मंत्री जी ने कहा कि यदि आपको मानवीय जीवन मिला है, तो उसे समाज की सेवा और परमार्थ के लिए समर्पित करना चाहिए। साथ ही उन्होंने सभी नागरिकों से पर्यावरण को बचाने का आह्वान भी किया, क्योंकि प्रकृति का संरक्षण ही मानव सभ्यता के विकास का आधार है। श्री धर्मवीर प्रजापति जी ने आगे कहा कि भारत का संविधान, जिसे स्वयं बाबासाहेब ने अपने अद्वितीय ज्ञान और दूरदृष्टि से तैयार किया, हमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है और राष्ट्रनिर्माण में प्रत्येक नागरिक के कर्तव्यों की याद भी दिलाता है। अतः हमें संविधान के मूल्यों को अपने व्यवहार में उतारते हुए एक समरस, संवेदनशील और विकसित समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए।
         बीबीएयू कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत की अर्थव्यवस्था अत्यंत कमजोर और बिखरी हुई थी, जिसे एक लंबी साधनात्मक यात्रा के बाद संभाला गया, और इस दिशा में भारत के संविधान का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत एक उभरता हुआ, तीव्र गति से प्रगतिशील राष्ट्र है, और यदि हमें वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र तथा 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है, तो आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक को रोजगार उपलब्ध हो, सभी के जीवन-स्तर में सुधार आए और समग्र विकास की प्रक्रिया में किसी को पीछे न छोड़ा जाए। उन्होंने पश्चिमी एवं भारतीय संस्कृति का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए बताया कि जहाँ पश्चिमी संस्कृति उपभोगवाद और भौतिक आकर्षण की प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है, वहीं भारतीय संस्कृति इसके ठीक विपरीत संयम, संतुलन और सतत विकास के आदर्शों को प्रतिपादित करती है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति का धनी है, और ऐसे में युवाओं को अपनी ऊर्जा, प्रतिभा तथा क्षमता को सही दिशा में लगाकर भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प में योगदान देना चाहिए। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि युवा उद्यमिता, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति तथा सभ्यता जैसे क्षेत्रों से जुड़ें और राष्ट्र निर्माण में अपनी निर्णायक भूमिका निभाएँ।
         डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एस.के. भटनागर ने चर्चा के दौरान कहा कि कानून का शासन विकसित भारत के कल्पित स्वरूप को साकार करने के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही वह सिद्धांत है जो हर नागरिक को समान अधिकार, गरिमा और न्याय की सुरक्षा देता है। उन्होंने बताया कि हमें स्वदेशी व्याख्या और भारतीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि विकास के हर चरण में हमारी सांस्कृतिक जड़ों, परंपराओं और स्थानीय आवश्यकताओं का सम्मान बना रहे। प्रो. भटनागर ने कहा कि भारत को सामाजिक लोकतंत्र की ओर बढ़ना चाहिए, जहाँ राजनीतिक लोकतंत्र के साथ-साथ सामाजिक समता, आर्थिक न्याय और मानवीय मूल्यों का विस्तार हो। इसके अतिरिक्त संविधान न केवल हमारे अधिकारों का संरक्षक है, बल्कि यह हमें कर्तव्यों की भी याद दिलाता है, जो राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के सपने को पूरा करने की दिशा में प्रत्येक नागरिक का मार्गदर्शन करते हैं। इसलिए संविधान दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम संविधान की भावना को अपने व्यवहार में उतारते हुए, न्यायपूर्ण, समरस और प्रगतिशील भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँगे।
            इस अवसर पर चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी के फैकल्टी ऑफ कामर्स एंड मैनेजमेंट की संकायाध्यक्ष प्रो. सुनीता भरतवाल द्वारा ‘सामाजिक- आर्थिक न्याय’ विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। साथ ही प्रतिभागियों के लिए दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ की डॉ. शश्या त्रिपाठी एवं द्वितीय तकनीकी सत्र बीबीएयू के मानवाधिकार विभाग के डॉ. रश्वेत श्रृंखल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों के लिए सिम्पोजियम प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान माननीय अतिथियों द्वारा द्वितीय बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के ब्रॉशर का विमोचन किया गया। साथ ही
‘भारत में खाद्य सुरक्षा और पोषण के अधिकार को आगे बढ़ाना: मानवाधिकारों के दृष्टिकोण से (Advancing Right to Food Security and Nutrition in India: Human Rights Perspective) शीर्षक पर वाले सेमिनार के ब्रॉशर का भी विमोचन किया गया। साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त डॉ. खुशनुमा बानो द्वारा इस द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की रिपोर्ट को सभी के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
          अंत में आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही डॉ. सूफिया अहमद ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
           समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, अन्य शिक्षक, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।
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