आईवीआरआई में “दूध प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

बरेली,14 मार्च। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर द्वारा संचालित फार्मर फर्स्ट परियोजना के अंतर्गत “दूध प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन” विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन दिनांक 9 से 13 मार्च 2026 तक पशु अनुवांशिकी विभाग एवं पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्राम कटकारमन के 12 किसानों एवं पशुपालकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को दूध एवं दुग्ध उत्पादों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा विपणन से संबंधित आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे अपने डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना सकें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संस्थान की संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में दुग्ध उत्पादों की उचित पैकेजिंग, लेबलिंग तथा प्रभावी विपणन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में डिजिटल माध्यमों एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) टूल्स के उपयोग से किसान अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुँचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है, जिससे बाजार में उनकी मांग एवं बिक्री में वृद्धि होती है और किसानों की आय भी बढ़ती है। उन्होंने किसानों को संगठित एवं सामूहिक रूप से कार्य करने के लिए भी प्रेरित किया।
समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं पशु अनुवांशिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुबोध कुमार ने अपने उद्बोधन में डेयरी व्यवसाय में उच्च उत्पादक नस्लों के चयन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कम उत्पादन देने वाले पशुओं को लंबे समय तक फार्म में रखने से डेयरी व्यवसाय की लाभप्रदता प्रभावित होती है। अतः पशुपालकों को वैज्ञानिक चयन एवं प्रजनन प्रबंधन अपनाकर अपने पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. ए. आर. सेन ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता के लिए प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए स्वच्छ दूध उत्पादन तथा दूध एवं दुग्ध उत्पादों के समुचित उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान एवं कौशल का उपयोग अपने डेयरी व्यवसाय को सुदृढ़ बनाने में करें। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन एवं प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों का आर्थिक सशक्तिकरण संभव है तथा इस क्षेत्र में नए उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने की भी अपील की।

फार्मर फर्स्ट परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं पशु अनुवांशिकी विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अश्वनी कुमार पाण्डेय ने परियोजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसान केवल उत्पादक ही नहीं, बल्कि सफल उद्यमी भी बन सकते हैं, जो अपने उत्पादों का प्रभावी विपणन कर बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में उत्पादन के साथ-साथ मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है, जिससे पशुपालन व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. देवेन्द्र कुमार ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि घरेलू एवं लघु स्तर पर दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों एवं ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को स्वच्छ दूध उत्पादन, गुणवत्ता परीक्षण, दूध का संग्रहण एवं परिवहन, प्राथमिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों का निर्माण तथा उप-उत्पादों के उपयोग से संबंधित विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अश्वनी कुमार पाण्डेय, प्रधान अन्वेषक, फार्मर फर्स्ट परियोजना ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर फार्मर फर्स्ट परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों के साथ-साथ पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के अन्य वैज्ञानिक एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
