आईवीआरआई में एम.वी.एस.सी.एवं पी.एच.डी के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन

बरेली,12 फरवरी । भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर में कल एम.वी.एससी. एवं पीएच.डी. के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अभिमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में संस्थान के संयुक्त निदेशकों सहित विभागाध्यक्षों ने भाग लिया ।
अपने सम्बोधन में संस्थान के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे डॉ. राघवेन्द्र भट्टा, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें अनुशासन, परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया। उन्होने कहा कि आईवीआरआई जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश प्राप्त करना स्वयं में एक उपलब्धि और सौभाग्य की बात है। देशभर से अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी यहां अध्ययन हेतु प्रयास करते हैं, ऐसे में चयनित विद्यार्थियों को इस अवसर का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए। उन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि जीवन में कभी-कभी इच्छित अवसर नहीं मिल पाते, किंतु ईश्वर की योजना सदैव बेहतर होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं से निराश न होकर निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पशु चिकित्सा व्यवसाय अत्यंत प्रतिस्पर्धी हो चुका है। बदलते परिदृश्य में विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित न रहकर उद्योगोन्मुखी एवं व्यवहारिक दक्षता भी विकसित करनी होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को निजी कंपनियों, फीड उद्योग एवं अन्य क्षेत्रों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करना चाहिए, जिससे वे रोजगार के विविध अवसरों के लिए तैयार रह सकें। डॉ. भट्टा ने कहा कि संस्थान में उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं तथा अन्य संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने पुराने समय में संदर्भ सामग्री संकलन की परंपरा का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन एवं शोध पत्रों के गहन अध्ययन की आदत विकसित करने की सलाह दी।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ एस के मेंदीरत्ता ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस वर्ष पीएच.डी. कार्यक्रम में कुल 86 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है, जिनमें 82 छात्र इज्जतनगर परिसर तथा 4 छात्र बेंगलुरु परिसर में नामांकित हुए हैं। इसी प्रकार एम.वी.एससी. कार्यक्रम में कुल 166 विद्यार्थियों को प्रवेश प्रदान किया गया, जिनमें 144 इज्जतनगर परिसर एवं 22 बेंगलुरु हब में प्रवेशित हुए हैं। इसके अतिरिक्त एम.एससी. एवं एम.बी.ए. कार्यक्रमों में भी 8-8 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है। एम.एससी. कार्यक्रम के अंतर्गत बायोइन्फॉर्मेटिक्स, कृषि अर्थशास्त्र एवं कृषि सांख्यिकी विषय सम्मिलित हैं।
संस्थान द्वारा इस वर्ष बी.टेक. बायोटेक्नोलॉजी कार्यक्रम में 20 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है। उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम वर्ष 2023 में प्रारंभ किया गया था और वर्तमान में इसका तृतीय बैच संचालित हो रहा है। साथ ही इस वर्ष से बी.टेक. डेयरी टेक्नोलॉजी कार्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है, जिसकी प्रवेश क्षमता 15 विद्यार्थियों की है। बी.वी.एससी. एवं ए.एच. कार्यक्रम में इस वर्ष 8वें बैच में 60 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया है। यह कार्यक्रम वर्ष 2015 में 20 विद्यार्थियों के साथ प्रारंभ हुआ था और आज यह संस्थान का प्रमुख (फ्लैगशिप) कार्यक्रम बन चुका है।
इस वर्ष भी संस्थान को देशभर के मेधावी एवं उच्च रैंक प्राप्त विद्यार्थियों से अत्यंत सकारात्मक प्रभाव प्राप्त हुआ। अधिकांश सीटें प्रथम एवं द्वितीय काउंसलिंग में ही भर गईं। यहाँ तक कि 8 भुगतान सीटों तथा 2 एनआरआई/ओसीआई सीटों के लिए भी कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी गई।
इससे पूर्व अपने संबोधन में परीक्षा नियंत्रक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक नियमावली एवं परीक्षा प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में बहु-प्रवेश एवं बहु-निर्गम की सुविधा उपलब्ध है, जिससे विद्यार्थी आवश्यकता पड़ने पर अस्थायी रूप से अध्ययन अवकाश लेकर पुनः अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ अंशुक शर्मा द्वारा किया गया जबकि धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ रजिस्ट्रार श्री राजीव लाल द्वारा दिया गया इस अवसर पर संयुक्त निदेशक शोध डॉ एस के सिंह, संयुक्त निदेशक, प्रसार शिक्षा डॉ रूपसी तिवारी, संयुक्त निदेशक, केडराड डॉ सोहिनी डे, मुक्तेश्वर परिसर के संयुक्त निदेशक डॉ यशपाल मलिक सहित विभिन्न परिसरों के संयुक्त निदेशकगण, विभिन्न विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य तथा इज्जतनगर एवं बेंगलुरु परिसर के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट



