आईवीआरआई में उड़ीसा सरकार के पैरावेटरनरी स्टाफ हेतु पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन एवं कृत्रिम गर्भाधान पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित

बरेली,28 फरवरी। आईसीएआर – भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान द्वारा 23 से 27 फरवरी 2026 तक “प्राथमिक पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन एवं कृत्रिम गर्भाधान” विषय पर पाँच दिवसीय सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण उड़ीसा पशुपालन विभाग के पैरावेटरनरी स्टाफ के लिए आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का प्रायोजन Veterinary Officers Training Institute (VOTI), उड़ीसा राज्य सरकार द्वारा किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अग्रिम पंक्ति के पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की तकनीकी दक्षता में वृद्धि करना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्राथमिक पशुधन स्वास्थ्य देखभाल के लगभग सभी पहलुओं को समग्र रूप से शामिल किया गया, विशेष रूप से कृत्रिम गर्भाधान (AI) एवं बड़े पशुओं में गर्भ परीक्षण पर विशेष बल दिया गया। प्रतिभागियों को कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक, वीर्य प्रबंधन, हीट पहचान (Heat Detection) तथा बड़े पशुओं में गर्भ परीक्षण की सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। साथ ही, बकरियों में उदर विधि (Abdominal Method) द्वारा गर्भ परीक्षण का भी प्रशिक्षण दिया गया, जो लघु जुगाली करने वाले पशुओं के क्षेत्रीय प्रबंधन के लिए अत्यंत उपयोगी है।
क्लिनिकल एवं प्रायोगिक सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को नवीनतम निदान तकनीकों, उन्नत उपचार प्रोटोकॉल तथा वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन पद्धतियों से अवगत कराया गया। पाठ्यक्रम में थनैला (Mastitis) की रोकथाम एवं प्रबंधन, वैज्ञानिक आहार अनुसूची, टीकाकरण कार्यक्रम, विषाक्त पौधों की पहचान तथा पशु रोग प्रबंधन में एथ्नो-वेटरनरी (पारंपरिक) उपचार पद्धतियों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। सामान्य क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं प्रजनन समस्याओं के समाधान हेतु व्यावहारिक एवं समस्या-समाधान आधारित दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया गया। समापन समारोह में कोर्स निदेशक डॉ. रुपसी तिवारी एवं कोर्स समन्वयक डॉ. बृजेश कुमार उपस्थित रहे। अपने समापन उद्बोधन में डॉ. रुपसी तिवारी ने कहा कि IVRI, ओडिशा सरकार के पशुपालन विभाग के लिए एक ज्ञान सहयोगी (Knowledge Partner) के रूप में कार्य कर रहा है तथा भविष्य में निरंतर सहयोग एवं ज्ञान साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य की पशु चिकित्सा प्रणाली को आवश्यकता पड़ने पर IVRI के विशेषज्ञ सदैव तकनीकी सहयोग प्रदान करने हेतु उपलब्ध रहेंगे।
डॉ. बृजेश कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रमुख विषयों एवं प्रतिभागियों में विकसित व्यावहारिक दक्षताओं का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रतिभागियों की उत्साही सहभागिता की सराहना की तथा कार्यक्रम के सफल समन्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजकों ने संयुक्त निदेशालय, प्रसार शिक्षा के श्री आकाश, श्री वीर सिंह एवं अन्य स्टाफ सदस्यों के सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल एवं सुचारु संचालन संभव हो सका। समग्र रूप से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पैरावेटरनरी कर्मियों के क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ, जिससे वे जमीनी स्तर पर प्रभावी प्राथमिक पशुधन स्वास्थ्य सेवाएँ एवं प्रजनन संबंधी सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम होंगे तथा ओडिशा में सतत पशुधन विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

