आंखों और माथे में लगातार दर्द? ये 5 वजहें हो सकती हैं जिम्मेदार, जानें कब है खतरा

बढ़ता स्क्रीन टाइम, बदलती लाइफस्टाइल और तनाव ने कई लोगों की दिनचर्या में ऐसी परेशानी जोड़ दी है, जो पहले कम ही सुनने को मिलती थी। आंखों और माथे में दर्द की शिकायत आजकल आम हो गई है। यह दर्द कभी हल्का-सा लगता है तो कभी इतना तेज कि रोज़मर्रा का काम भी रुक जाता है। कुछ लोगों को सुबह उठते ही दर्द महसूस होता है, तो कुछ को देर तक मोबाइल या लैपटॉप देखने के बाद। कई बार लोग इसे सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन लगातार बना रहने वाला दर्द किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है। आइए जानते हैं कि आंखों और माथे में दर्द किस बीमारी की वजह से हो सकता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

आंखों और माथे में दर्द किस बीमारी का संकेत है?
आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार आंखों और माथे में दर्द का सबसे आम कारण साइनस की समस्या हो सकती है। साइनस में सूजन या इंफेक्शन होने पर माथे, नाक की जड़ और आंखों के आसपास भारीपन और दबाव जैसा दर्द महसूस होता है। इसके अलावा माइग्रेन भी एक बड़ी वजह है, जिसमें सिर के एक हिस्से के साथ आंखों में तेज दर्द, मतली, उल्टी और तेज रोशनी से परेशानी हो सकती है।
दर्द के अन्य कारणों में आंखों की कमजोरी, चश्मे का गलत नंबर, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आई स्ट्रेन, हाई ब्लड प्रेशर, डिहाइड्रेशन और तनाव शामिल हैं। नींद की कमी होने पर आंखों में जलन, भारीपन और सिरदर्द के साथ यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
आंखों और माथे में दर्द कब ज्यादा होता है? और कब है खतरनाक?

यह दर्द अक्सर ज्यादा देर तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखने के बाद बढ़ जाता है। साइनस के मरीजों को सुबह के समय ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है। तनाव, नींद पूरी न होना और तेज धूप में निकलना भी दर्द को बढ़ा सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से माइग्रेन या आंखों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
अगर दर्द के साथ धुंधला दिखना, उल्टी, तेज बुखार या आंखों में सूजन हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कैसे करें बचाव?
- रोजाना पर्याप्त पानी पिएं, ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
- स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल कम करें और बीच-बीच में आंखों को आराम दें।
- सही नंबर का चश्मा पहनें और समय-समय पर आंखों की जांच कराएं।
- ठंड, धूल और प्रदूषण से बचाव करें; साइनस की समस्या हो तो विशेष सावधानी रखें।
- पूरी नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन अपनाएं।

