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भारत के मॉनसून पर मंडराया एल नीनो का खतरा, अमेरिकी मौसम एजेंसी ने जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली: भारत के मॉनसून पर इस साल एल नीनो का साया मंडरा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम एजेंसी की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, जून-अगस्त के दौरान एल नीनो बनने की संभावना 62% है, जो बाद के महीनों में 80% से अधिक हो सकती है। इस एल नीनो के असर से देश में अत्यधिक गर्मी और सूखे की स्थिति बन सकती है।

मौसम विभाग द्वारा फरवरी में जारी पूर्वानुमान में जुलाई-सितंबर तक एल नीनो बनने की संभावना 52 प्रतिशत बताई गई थी, अब यह संभावना और अधिक बढ़ गई है। एल नीनो आमतौर पर भारत में कमजोर या सामान्य से कम मॉनसून से जुड़ा होता है।
अगले दो महीनों में स्पष्ट होगी स्थिति
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव और अनुभवी मौसम विज्ञानी एम. राजीव ने कहा, दुनिया की प्रमुख मौसम एजेंसियों की सहमति को देखते हुए इस साल एल नीनो बनने की संभावना काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा, हालांकि अगले दो महीनों में स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन हम काफी हद तक निश्चित हो सकते हैं कि इस वर्ष अल नीनो आएगा।

क्या है एल नीनो?
एल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के तापमान के बढ़ने से बनने वाली जलवायु स्थिति है, जो दुनिया भर के मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 1980 से अब तक भारत में 14 एल नीनो वर्ष हुए हैं। जिसमें से 9 साल भारत में कमजोर मॉनसून रहा है, जिसकी वजह से बारिश कम हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दीर्घकालिक औसत से कम से कम 10 प्रतिशत बारिश कम हुई है। एक अन्य वर्ष, 2028 में मॉनसून की बारिश लगभग -9.4% रही।

IOD के पूर्वानुमान विश्वसनीय नहीं
एम. राजीव ने कहा, अल नीनो और भारत में कम मॉनसून के बीच मजबूत संबंध है, हालांकि कुछ अपवाद भी रहे हैं। सबसे उल्लेखनीय उदाहरण 1997 का है, जब अत्यधिक मजबूत अल नीनो के बावजूद मॉनसून सामान्य रहा। उन्होंने कहा, इंडियन ओशन डाइपोल के पूर्वानुमान बहुत कम विश्वसनीय होते हैं और भारतीय मॉनसून पर इसका प्रभाव स्थिर और निरंतर नहीं होता है।’

यूरोपीय मौसम एजेंसी ECMWF ने चेतावनी दी है कि इस साल प्रशांत महासागर तेजी से गर्म हो सकता है, जिससे बहुत मजबूत या सुपर एल नीनो बनने की संभावना है और इससे दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड गर्मी पड़ सकती है।

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