बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर खतरा: मोबाइल में तुरंत बदलें ये सेटिंग्स, अमेरिका की घटना ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली: पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, स्मार्टफोन बच्चों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है, लेकिन इसके साथ डिजिटल खतरे भी तेजी से बढ़े हैं। ऑनलाइन क्लास के नाम पर इंटरनेट इस्तेमाल करते हुए बच्चे कब गलत कंटेंट या खतरनाक प्लेटफॉर्म की चपेट में आ जाएं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में एआई तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और इसमें युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक है। इसी के साथ डीपफेक, फर्जी सूचनाएं और एआई चैटबॉट्स से जुड़े जोखिम भी अभिभावकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।

अमेरिका की घटना ने क्यों बढ़ाई चिंता
डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के लिए इंटरनेट अब पहले से कहीं ज्यादा संवेदनशील हो चुका है। अमेरिका में हाल ही में सामने आई एक घटना में 14 वर्षीय किशोर द्वारा एआई चैटबॉट से लगातार बातचीत के बाद आत्मघाती कदम उठाने की खबर ने दुनियाभर में अलार्म बजा दिया। इसके अलावा कुछ एआई प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कंटेंट की मौजूदगी भी सामने आई है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि माता-पिता को बच्चों पर नजर रखने के लिए जासूसी नहीं, बल्कि समझदारी भरी डिजिटल निगरानी अपनानी चाहिए। वॉचर जैसे मॉनिटरिंग ऐप्स से बच्चे की लोकेशन, नोटिफिकेशन और ऐप इस्तेमाल पर नजर रखी जा सकती है।
चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी पर नियंत्रण जरूरी
स्कूल प्रोजेक्ट और होमवर्क के लिए बच्चे तेजी से चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में इन प्लेटफॉर्म्स पर पेरेंटल कंट्रोल बेहद अहम हो जाता है। चैटजीपीटी में फैमिली अकाउंट विकल्प के जरिए बच्चे की गतिविधियों पर सीमाएं तय की जा सकती हैं। वहीं गूगल जेमिनी के इस्तेमाल के लिए फैमिली लिंक सिस्टम के जरिए बच्चे के अकाउंट को कंट्रोल में रखा जा सकता है, ताकि एआई से मिलने वाले जवाब सुरक्षित और उम्र के अनुरूप हों।
यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर रखें खास नजर
सोशल मीडिया बच्चों के लिए सबसे ज्यादा जोखिम भरा क्षेत्र माना जाता है। यूट्यूब पर फैमिली सेंटर के माध्यम से बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल बनाकर कंटेंट को सीमित किया जा सकता है। अगर बच्चे का निजी फोन है, तो फैमिली लिंक से सर्च और सुझावों पर रोक लगाई जा सकती है। वहीं इंस्टाग्राम पर सुपरविजन फॉर टीन्स फीचर को एक्टिव करके यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि बच्चे की फीड में आपत्तिजनक पोस्ट या संदिग्ध अकाउंट्स न दिखें।

थर्ड पार्टी ऐप्स से मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा
कई मामलों में मोबाइल की डिफॉल्ट सेटिंग्स पर्याप्त नहीं होतीं। ऐसे में कुछ थर्ड पार्टी ऐप्स बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बना सकते हैं। नेट नैनी वेबसाइट और सोशल मीडिया कंटेंट को फिल्टर करता है, जबकि कैनोपी ऐप फोटो और टेक्स्ट में मौजूद अनुचित सामग्री को पहचानकर ब्लॉक कर देता है। वहीं कस्टोडियो जैसे ऐप्स बच्चे की ब्राउजिंग और स्क्रीन टाइम की पूरी जानकारी अभिभावकों तक पहुंचाते हैं।

