Wednesday, February 11, 2026
उत्तर प्रदेशराज्य

बजट 2026-27 पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री की प्रतिक्रिया पर्यटन और संस्कृति को मिला ऐतिहासिक प्रोत्साहन, विकास को मिलेगी नई रफ्तार

 

 

लखनऊ,

नैमिषारण्य और अयोध्या पर प्रमुख फोकस, वाराणसी और विंध्याचल में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के विस्तार की बड़ी तैयारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित बजट, नए पर्यटन सर्किट के जरिए फैमिली टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा प्रदेशभर में होमस्टे नेटवर्क का बड़े स्तर पर विस्तार, 5000 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य, पर्यटन को रोजगार सृजन का मजबूत स्तंभ माना गया बजट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर सशक्त करने की स्पष्ट प्रतिबद्धता दर्शाता है: जयवीर सिंह

11 फर वरी, 2026 उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते मा० मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना जी द्वारा प्रस्तुत बजट को ऐतिहासिक बताया। बजट में बुनियादी ढांचे, जनकल्याण और विकासोन्मुखी क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें पर्यटन और संस्कृति प्रमुख फोकस के रूप में उभरे हैं। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में और मजबूत पहचान दिलाना है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह* ने बजट 2026-27 में पर्यटन और संस्कृति को प्राथमिकता दिए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या प्रदेश के पर्यटन स्थलों के प्रति विश्वास और आस्था का प्रमाण है। मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि वाराणसी में पर्यटकों की संख्या वर्ष 2024 में लगभग 11.01 करोड़ से बढ़कर 2025 में 17.30 करोड़ से अधिक हो गई। अयोध्या में यह संख्या 16.44 करोड़ से बढ़कर 29.95 करोड़ से अधिक पहुंच गई। मथुरा में 9.01 करोड़ से बढ़कर 10.24 करोड़ से अधिक, जबकि प्रयागराज में महाकुंभ 2025 के दौरान 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व उपस्थिति दर्ज की गई। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2026 में चल रहे माघ मेले में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। मिर्जापुर में पर्यटकों की संख्या 1.41 करोड़ से बढ़कर 2.10 करोड़ से अधिक और चित्रकूट में 1.18 करोड़ से बढ़कर 3.65 करोड़ से अधिक हो गई है।

जयवीर सिंह ने कहा कि अयोध्या, नैमिषारण्य, वाराणसी, विंध्याचल, मथुरा और प्रयागराज में बजट के माध्यम से किए गए विशेष प्रावधान पर्यटक सुविधाओं को और बेहतर बनाएंगे। इससे औसत प्रवास अवधि दो-तीन दिन से बढ़कर लगभग एक सप्ताह तक होने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को व्यापक लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि पर्यटन सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला गाइड प्रशिक्षण हेतु लाइसेंस शुल्क माफ किया जाएगा, जिसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है।

 

पर्यटन मंत्री ने बताया कि जनवरी से जून 2025 के बीच प्रदेश में लगभग 122 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें 121 करोड़ से अधिक घरेलू और 33 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल हैं। यह वृद्धि आस्था पर्यटन, पारिवारिक यात्राओं और विरासत स्थलों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। पर्यटन स्थलों के समग्र विकास हेतु ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास योजना’ के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। अयोध्या को विशेष प्राथमिकता देते हुए उत्तर प्रदेश श्री अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के पर्यटन अवसंरचना विकास हेतु 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

धार्मिक पर्यटन सर्किट को सुदृढ़ करने की दिशा में नैमिषारण्य क्षेत्र में पर्यटन अवसंरचना विकास के लिए उत्तर प्रदेश श्री नैमिषारण्य तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसी प्रकार ब्रज क्षेत्र में तीर्थ एवं पारिवारिक पर्यटन को सशक्त बनाने के लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद के अंतर्गत मथुरा में विकास कार्यों का प्रस्ताव किया गया है।
विंध्यवासिनी देवी धाम तथा वाराणसी में पर्यटक सुविधाओं के विस्तार हेतु 100-100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जिससे वाराणसी-मिर्जापुर क्षेत्र को एक प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सके। इन प्रावधानों से संपर्क, सुविधाओं और पर्यटक अनुभव में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

 

इसके अतिरिक्त प्रदेश में होमस्टे नेटवर्क के विस्तार पर भी कार्य किया जाएगा। 5000 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए उपयुक्त बजटीय प्रावधान किए गए हैं। पर्यटन को प्रदेश में रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम माना गया है।

सांस्कृतिक क्षेत्र में भी सरकार ने विरासत संरक्षण और राष्ट्रीय विभूतियों के सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाया है। बलरामपुर के इमिलिया कोडर में थारू जनजाति संस्कृति संग्रहालय का निर्माण कर लोकार्पित किया जा चुका है। रामनगर, वाराणसी में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री के पैतृक निवास पर संग्रहालय स्थापित कर आम जनता के लिए खोला गया है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर में सांस्कृतिक संकुल का निर्माण पूर्ण कर लोकार्पित किया गया है। लखनऊ के ऐशबाग में भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण कार्य प्रगति पर है। प्रयागराज में निषादराज गुहा सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना कर सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान दिया गया है।

संपर्क सूत्र- अभिषेक सिंह

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