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ईरान युद्ध पर ट्रंप प्रशासन घिरा, अमेरिकी सांसद बोले-‘कोई स्पष्ट रणनीति नहीं’

वाशिंगटन : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका की राजनीति में भी बहस तेज हो गई है। डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस मार्फी ने डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ईरान युद्ध को लेकर सरकार के पास कोई स्पष्ट योजना नहीं है।

मर्फी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्हें मंगलवार को इस युद्ध पर दो घंटे की बंद कमरे में ब्रीफिंग दी गई थी। इसके बाद उन्हें लगा कि अमेरिका और Israel द्वारा चलाए जा रहे इस सैन्य अभियान के लिए ट्रंप प्रशासन के पास ठोस रणनीति नहीं है।

कनेक्टिकट से सीनेटर मर्फी ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि सरकार के पास Strait of Hormuz को सुरक्षित तरीके से दोबारा खोलने की कोई स्पष्ट योजना नहीं है। ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित करने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है। मर्फी के अनुसार, प्रशासन ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि अगर ईरान इस जलमार्ग को अवरुद्ध करता है तो अमेरिका उसे कैसे और कितनी जल्दी खोल पाएगा।

सीनेटर मर्फी ने यह भी कहा कि युद्ध का मुख्य उद्देश्य Iran के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना नहीं दिख रहा है, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार यही लक्ष्य बताते रहे हैं। उनका कहना था कि केवल हवाई हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम या सामग्री को पूरी तरह नष्ट करना संभव नहीं है।

मर्फी ने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने ब्रीफिंग में यह भी संकेत दिया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन अब अमेरिकी रणनीति का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो यह युद्ध बेहद महंगा साबित हो सकता है—अरबों डॉलर खर्च होंगे और अमेरिकी सैनिकों की जान भी जा सकती है, लेकिन अंत में ईरान में वही या उससे भी ज्यादा अमेरिका-विरोधी सरकार बनी रह सकती है।

सीनेटर मर्फी के मुताबिक फिलहाल ऐसा लगता है कि अमेरिकी रणनीति केवल ईरान की मिसाइल क्षमता, जहाजों और ड्रोन निर्माण केंद्रों को निशाना बनाने तक सीमित है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बमबारी रुकने के बाद ईरान फिर से इन हथियारों का उत्पादन शुरू कर दे तो अमेरिका की अगली योजना क्या होगी। मर्फी ने चेतावनी दी कि स्पष्ट रणनीति के बिना यह संघर्ष लंबे और अंतहीन युद्ध में बदल सकता है।

गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।

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