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रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ

बरेली, 06 दिसम्बर। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय बरेली के शिक्षा विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ । यह संगोष्ठी आईसीएसएसआर द्वारा वित्तपोषित है।
गोष्ठी के उद्घाटन सत्र का आयोजन विश्वविद्यालय के MBA विभाग स्थित प्रो एस बी सिंह ऑडिटोरियम मे हुआ ।
सत्र का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ तथा सेमिनार डायरेक्टर प्रो संतोष अरोड़ा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया एवं सेमिनार संयोजक डॉ मीनाक्षी द्विवेदी ने सेमिनार के विषय के संदर्भ में भूमिका प्रस्तुत की ।
इसके पश्चात विशेष आमंत्रित वक्ता के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ से आयीं प्रो अमिता गुप्ता में अपने वक्तव्य में कहा कि विभिन्न प्रकार की तकनीक हम सबको ग़लत दिशा में ले जा रही है आजकल के विद्यार्थी विभिन्न प्रकार के आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस ऐप्स का प्रयोग कर अपने कार्य को करते हैं और शिक्षक विद्यार्थी का मूल्यांकन करते हैं तब प्रश्न उठता है क्या हम वास्तव में विद्यार्थी के ही विचारों का मूल्यांकन कर रहे हैं । हम तकनीक के अधीन होते जा रहे हैं जबकि तकनीक केएल हमे एक टूल के रूप में ही प्रयोग करना चाहिए । शिक्षा 5.0 तकनीक को मानव मूल्यों से युक्त करना चाहती है अथ हमे समाज के भले के लिए इस प्रकार की पहल को बढ़ावा देना चाहिए और समर्थन भी करना चाहिए ।
विशिष्ट वक्ता दिल्ली बिश्वविद्यालय के प्रो रजनी रंजन सिंह ने बताया कि तकनीक का आविष्कार मानव के कार्य करने की सहूलियत के लिए हुआ । शिक्षा के क्षेत्र में भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसने सदैव मूल्यों को महत्व दिया । पहले हम विद्या प्राप्त करने के लिए गुरु के पास जाते थे फिर हम विद्या से शिक्षा की और चले गए और अब हम शिक्षा में भी केवल सूचना संप्रेषण तक सीमित हो गए । मनुष्य आभासी वास्तविकता में जी रहा है मनुष्य की मनुष्य से दूरी होती जा रही है और सोशल मीडिया पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं यह स्थिति ठीक नहीं है । तकनीक मनुष्य का विकल्प नहीं हो सकती वह केवल मनुष्य की कार्य क्षमता बढ़ाने का एक माध्यम मात्र हो सकती है ।
बीजवक्ता के रूप में यूनिवर्सिटी ऑफ़ फिज़ी के पूर्व प्रोफेसर डॉ आर सी शर्मा ने कई प्रकार के AI टूल्स के बारे में बताया तथा ये बताया कि हम बिना तकनीक के आगे नहीं बढ़ सकते आज सभी विद्यार्थी और शिक्षक तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं उसको हम रोक नहीं सकते बल्कि हम तकनीक के सही और सार्थक उपयोग के बारे में विचार विमर्श करना प्रारंभ करें साथ ही अपने मानवीय गुण नैतिकता संवेदना आदि को भी सुरक्षित रखें ।मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के पी सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि वह नवीन तकनीक की जानकारी एकत्र करें तथा उनको भारतीय समाज के अनुरूप प्रयोग करें मशीन लर्निंग में मनुष्य मशीन न बने और हमारा समाज तकनीक के प्रभाव में अपना प्रभाव न भूले।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव डॉ राम बाबू सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कार्यक्रम का संचालन विमल कुमार ने किया ।
उद्घाटन सत्र के पश्चात अलग अलग तकनीकी सत्र रहे जिसमे अलग अलग शैक्षिक संस्थानों से रिसोर्स पर्सन आए और उन्होंने शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया ।
संगोष्ठी के प्रथम दिन कुल …..शोधार्थियों ने शोध पत्र पढ़े
संगोष्ठी में कुकनो बिश्वविद्यालय से प्रो अपर्णा गोडबोले, डॉ किरणलता डंगवाल, दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो प्रवीण कुमार तिवारी, प्रो गौरव राव जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी दिल्ली से प्रो कौशल शर्मा रिसोर्स पर्सन के रूप में आए तथा प्रो यशपाल सिंह , प्रो अंजू अग्रवाल , प्रो सुधीर कुमार वर्मा , डॉ तरुण राष्ट्रीय , डॉ प्रतिभा सागर , डॉ प्रेमपाल सिंह , डॉ कीर्ति प्रजापति, डॉ सुरेश कुमार , डॉ रश्मि रंजन सिंह, चीफ प्रॉक्टर प्रो रवेंद्र सिंह, डॉ ललित पांडे, डॉ आभा त्रिवेदी की उपस्थिति रही तथा सभी शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का सभी व्यवस्थाओं में सहयोग रहा

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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