पुतिन सरकार क्यों दे रही है रूसी सैनिकों को स्पर्म फ्रीज कराने की सुविधा?

रूस. रूस यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए 10 महीने हो चुके हैं. अब भी ना तो इस युद्ध को खत्म होने के आसार नजर आ रहे हैं ना ही प्रयास. हां, दोनों ओर से हुए हमलों की खबरें जरूर आ रही हैं. इतने लंबे समय से चल रहे युद्ध में मारे गए सैनिकों की संख्या भी बिखरी है. युद्ध में दोनों पक्षों से मरे घायलों में कुल एक लाख सैनिक तो 40 हजार आम लोग शामिल हैं. फिर भी दोनों ओर से नई रणनीति संबंधी गतिविधियों, विशेष तौर पर यूक्रेन को दी जाने वाले अमेरिकी सहायता की ज्यादा चर्चा में होती हैं. रूस के भी युद्ध में भारी संख्या में सैनिकों को झोंकने की चर्चा रही है. अब रूस अपने सैनिकों को मुफ्त में स्पर्म फ्रीज करने की सुविधा भी दे रहा है.

हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका की यात्रा की और उनसे भारी मात्रा में मदद भी हासिल की है जिस पर रूस ने सख्त ऐतराज भी जताया था. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अब तक इस युद्ध में 67 अरब डॉलर से ज़्यादा की राशि को स्वीकृत कर चुका है. साल 2023 में 45 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है. इसके जवाब में रूस क्या कर रहा है इस पर भी सबकी नजर है.

रूस भी अपनी ओर से ये युद्ध जीतने की दिशा में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता. रूस ने कुछ ही समय पहले करीब तीन लाख सैनिकों की युद्ध में तैनाती का फैसला किया है. जिसके बाद रूस से कई लोगों के भागने की खबरें आईं लेकिन रूसी पुरुष खुद हीअपे स्पर्म फ्रीज कराने के लिए क्लीनिक में जा रहे हैं. अब पुतिन सरकार ने रूसी सैनिकों के लिए यह सुविधा मुफ्त कर दी है.

रूसी सरकार मेडिकल इंश्योरेंस के नियमों में बदलाव करके स्पर्म फ्रीज कराने की सुविधा को मुफ्त करने का फैसला किया है. रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक रूसी वकील संघ के प्रमुख आइगोर ट्रूनोव ने बताया है कि स्वास्थ्य विभाग ने उनकी फ्री क्रायोबैंक और जरूरी मेडिकल इंश्योरेंस में बदलाव से जुड़ी अपील का मान लिया है.

दरअसल ऐसा तब से ज्यादा हो रहा है जब रूसी जोड़ों में से पुरुषों को सेना में जाने का आदेश मिला है और रूसी महिलाएं भी चाहती हैं कि उनके पति युद्ध में जाएं उससे पहले उनका स्पर्म संरक्षित किया जा सके जिससे अगर उनके पति को युद्ध में कुछ हो गया तो उन्हें बच्चा पैदा करने में कोई परेशानी ना हो. इसीलिए ट्रूनोव ने ट्विटर पर ऐलान किया था कि उनकी यूनियन ने ऐसे कई जोड़ों की ओर से याचिका दायर की थी जिसमें पति को विशेष सैन्य अभियान में हिस्सा लेने का आदेश मिला है.

रूसी सरकार के तरफ से अभी तक इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं मिली है. रूस के स्वास्थ्य विभाग ने भी ट्रूनोव के बयान पर कुछ नहीं कहा है. वहीं ट्रूनोव के मुताबिक उनकी यूनियन इस संबंध में और ज्यादा जानकारी हासिल करने का प्रयास कर रही है. सैनिकों की लामबंदी के आदेश के बाद से पुरुषों के स्पर्म फ्रीज कराने की घटनाओं में इजाफा हो गया है.

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