ब्रिटेन में मंकीपॉक्स के 10000 मामले?

लंदन: ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कुछ गे और बायसेक्सुअल पुरुषों, जिनमें मंकीपॉक्स होने का खतरा अधिक है, उन्हें वैक्सीन लगाई जानी चाहिए। बीबीसी के अनुसार, यह कदम ब्रिटेन में मंकीपॉक्स के प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। देश में अब तक इस वायरस से 793 लोग संक्रमित हो चुके हैं। इसके साथ वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मामले 10 हजार तक पहुंच सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंकीपॉक्स को यौन संचारित संक्रमण के रूप में परिभाषित नहीं किया गया है।

हालांकि, यह यौन संबंध के दौरान, बिस्तर, तौलिये और स्किन के साथ संपर्क में आने से भी फैलता है। यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी (UKHSA) ने कहा कि चेचक से बचाव के लिए बनाई गई वैक्सीन इम्वेनेक्स मंकीपॉक्स के संपर्क में आए मरीजों को वायरस से उबरने में मदद कर सकती है। वैक्सीन इम्वेनेक्स मंकीपॉक्स के खिलाफ प्रभावी है। इसको यूके के वैक्सीन विशेषज्ञों, संयुक्त टीकाकरण और प्रतिरक्षा समिति (जेसीवीआई) द्वारा मंजूरी मिल चुकी है।

लंदन बना वायरस का हॉटस्पॉट
ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार को 219 मामलों का पता चला है जो अब तक एक दिन में आए सबसे ज्यादा मामले हैं। लंदन इस वायरस का हॉटस्पॉट है। अमेरिका, स्पेन और जर्मनी समेत दर्जन भर देश इस वायरस से प्रभावित हैं। अभी तक ये वायरस अफ्रीका में ही पाया जाता था। लेकिन पहली बार है जब ये इतनी बड़ी संख्या में अफ्रीका से बाहर देखने को मिले हैं। इनमें से ज्यादातर समलैंगिक पुरुषों में मिले हैं। इस बीच मंकीपॉक्स मॉडलिंग करने वाले वैज्ञानिकों ने बढ़ते कोरोना की चेतावनी दी है। LSHTM में शामिल महामारी विज्ञानी प्रो जॉन एडमंड्स ने चेतावनी दी है कि अगर व्यवहार में सुधार नहीं हुआ तो मामले 10 हजार तक बढ़ सकते हैं। कोरोना प्रकोप के दौरान एडमंड्स सबसे मुखर सदस्यों में से रहे हैं।

सिर्फ समलैंगिक ही नहीं हो रहे संक्रमित
UKHSA ने मंगलवार को नई रणनीति पब्लिश की, जिसमें यह निर्धारित किया गया कि कुछ समलैंगिक पुरुष मंकीपॉक्स के के उच्च जोखिम में आते हैं। प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए इन्हें वैक्सीन लगाना चाहिए। अधिकारियों ने अभी ये नहीं बताया है कि कितने पुरुषों को वैक्सीन लगाई जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि संक्रमित के करीब आने वाला कोई भी व्यक्ति वायरस की चपेट में आ सकता है। इससे उसका समलैंगिक होना जरूरी नहीं है। लेकिन अभी ज्यादातर मामले वही हैं जो शारीरिक संबंध से हुए हैं।

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